धनबाद के डेंजर जोन इलाके में रहना हुआ मुश्किल, जानें अब तक यहां कितनी बार बन चुका है गोफ

धनबाद के डेंजर जोन इलाका जोगता 11 नंबर में गोफ का दायरा बढ़ने का सिलसिला जारी है. यहां हुई गोफ ने कई लोगों को घर से बेघर कर दिया है. हालात यह है कि इन्हें सर छिपाने तक के लिए जगह तक नहीं है.

धनबाद, इंद्रजीत पासवान : खेती के लिए जो वर्षा किसानों के लिए वरदान है, वही कभी-कभी डेंजर जोन में रहने वालों के लिए अभिशाप बन जाता है. यही कारण है कि डेंजर जोन में रहने वाले गरीब किसान हर पल ऊपर वाले से वर्षा नहीं होने की मन्नते मांगा करते हैं. इसका मुल कारण है कि जब-जब वर्षा हुई है इलाके में गोफ बन गया है. कभी-कभी तो गोफ में कई गरीबों का घर भी समा गया है. जिसके कारण घर से बेघर होकर गरीब खुले आसमान के नीचे आ जाते हैं. जिसका ताजा उदाहरण इन दिनों जोगता 11 नंबर में देखने को मिल रहा है. यहां हुई गोफ ने कई लोगों को घर से बेघर कर दिया है. हालात यह है कि इन्हें सर छिपाने तक के लिए जगह तक नहीं है. मजबुरी में यहां के लोग खुले आसमान के नीचे रहकर अपना जीवन यापन करने पर विवश हैं. हांलाकि बीसीसीएल की ओर से शुक्रवार को इनके लिए टेंट लगाया गया है. जो इनके लिए काफी नहीं है.

कई लोग हो चुके हैं जमींदोज

सिजुआ और कतरास क्षेत्र के कई इलाकों को डीजीएमएस तथा बीसीसीएल के सर्वे विभाग ने अति डेंजर जोन के रूप में चिन्हित किया है. रिपोर्ट की मानें तो बस्ती के नीचे आग और गैस तेजी से फैल रहा है. जिसके कारण गोफ और भू-धंसान होना कहा गया है. रिपोर्ट के अनुसार बताये गये आशंका सही साबित भी हुआ है. डेंजर जोन के रूप में चिन्हित 22 /12 तेतुलमुढ़ी में गोफ और जमींदोज होने की घटना कोई नई बात नहीं है. इसके पहले भी यहां हुई गोफ की घटना में वर्ष 1995 में छोटी मस्जिद के साथ-साथ कई लोगों का आवास जमींदोज हो गया था. 

कितनी बार इस इलाके में बना गोफ

  • वर्ष 2003 में यहां घटित गोफ की एक घटना में कुर्बान अंसारी नामक व्यक्ति के घर में गोफ बन गया था. जिसमे कुर्बान की मां मैमुन निशा जमींदोज हो गयी थी.

  • कुछ ही साल बाद 17 अक्टूबर 2022  को 22/12  से सटे गांव तेतुलमुढ़ी बस्ती में जोरदार आवाज के साथ दो गोफ बन गया था. दोनों गोफ की चौडाई लगभग 9 फीट थी. जबकि गोफ की गहराई लगभग 20 फीट थी.

  • बता दें कि 18 जुलाई 2022 को भी 22/12 में एक व्यक्ति का दो मंजिला छत अचानक से जोरदार आवाज के साथ धराशायी हो गया था. जिसमें घर के सभी लोग बाल-बाल बच गये थे.

  • इसके बाद 2022 सितंबर माह में जोगता फायर एरिया 15 के समीप गोफ बन गया था. जिसके अंदर एक गाय समा गया था. बाद में स्थानीय लोगों ने काफी मश्क्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था.

  • 28 मार्च 2022 को सिजुआ एरिया के मोदीडीह कोलियरी 22/12  में जोरदार आवाज के साथ चंदन कुमार सिंह के आवास व बाहरी हिस्से में 30 फिट की परिधि में भू-धंसान हो गया था. जिसकी गहराई लगभग 50 फीट होने का अनुमान लगाया गया था. इस घटना में चंदन कुमार के घर में रखे हजारों रुपये का घरेलू समान जहां जमींदोज हो गया था. वहीं, पुरा परिवार इस घटना में बच गये थे.

  • 30 मार्च 2022 को सिजुआ एरिया के बासदेवपुर कोलियरी अन्तर्गत एकडा हरिजन बस्ती में अहले सुबह जोरदार आवाज के साथ जमीन में दरार व गोफ बन गया था. 

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  • 14 जनवरी 2022 को बांसजोड़ा में सेवानिवृत प्रेमचंद राम के आवास में गोफ बन गया था. गोप से भारी मात्रा में गैस का रिसाव होने के कारण कई लोग इसकी चपेट में आकर बीमार हो गये थे.

  • वहीं, एक दिसंबर 2022 की संध्या 22/12 बस्ती स्थित जामा मस्जिद में जोरदार आवाज के साथ बड़ा सा गोफ बन गया था. जिसमें मस्जिद का बड़ा सा भाग मीनार समेत मस्जिद में रखे जेनरेटर बाजा सहित डेकोरेशन का पुरी सामग्री जमींदोज हो गया था.

  • इसके बाद 11 जून 2021 को मोदीडीह कोलियरी के अंतर्गत तेतुलमुढ़ी बस्ती स्थित शक्तिनाथ महतो उच्च विद्यालय के समीप गोफ बन गया था. गोप चार फीट के गोलाकार और 20 फीट की गहराई में बना था.

  • 10 अगस्त 2021 को दूसरी बार तेतुलमुढ़ी बस्ती के समीप दोबारा जोरदार आवाज के साथ एक स्थान पर दो बड़ा सा गोफ बन गया था.

  • फिर 27 जुलाई 2021 को मोदीडीह कोलियरी के जोगता 11 नम्बर में सोमवार की अहले सुबह जोरदार आवाज के साथ जमीन धस गया था. आवाज इतनी जोरदार थी की लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे थे.

  • 26 जुलाई 2021 को  कतरास क्षेत्र के अंगारपथरा कांटा पहाड़ी सब स्टेशन बिजली घर के समीप बुधवार की अहले सुबह जोरदार आवाज के साथ बडा सा गोफ बन गया था. इलाके में गोफ बनने की खबर जैसे ही लोगों को लगी सभी दहशत में आ गये थे. 

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अभी दो दिन पहले 15 अगस्त की रात जोगता 11 में  200 मीटर के दायरे गोफ बन गया था. जिसमें हनुमान जी के मंदिर समेत पिता पुत्र जमींदोज हो गये थे. जिन्हें स्थानीय युवकों ने अपनी जान पर खेलकर बचाया था. गोफ की घटना के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गये हैं. जिनके पास वर्तामान में सर छुपाने की भी जगह नहीं है. जबकि बीसीसीएल के ऐसे कई आवास हैं जिसमे नेता, युनियन के प्रतिनिधि कब्जा कर रखा है. यादि इन लोगों का आवास खाली कराकर प्रभावितों को रहने दे दिया जाता तो पुनर्वास की समस्या लगभग समाप्त हो जाता है.

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By Nutan kumari

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