Charlie Chopra & The Mystery Of Solang Valley Review:विशाल भरद्वाज की इस मर्डर मिस्ट्री में चमकी वामिका गब्बी

डस्ट्री के बेहतरीन निर्देशकों शुमार नेशनल अवार्ड विनिंग निर्देशक विशाल भारद्वाज ने टीवी और फिल्मों के बाद अब नये माध्यम ओटीटी की ओर रख कर लिया है. उनकी वेब सीरीज चार्ली चोपड़ा द मिस्ट्री ऑफ़ सोलंग वैली से इनदिनों स्ट्रीम कर रही है.

वेब सीरीज- चार्ली चोपड़ा और द मिस्ट्री ऑफ़ सोलंग वैली

निर्माता और निर्देशक-विशाल भारद्वाज

कलाकार-वामिका गब्बी, नीना गुप्ता, लारा दत्ता, नसीरुद्दीन शाह, रचना पाठक शाह, प्रियांशु पेनयुली, गुलशन ग्रोवर, हुमा कुरैशी और अन्य

प्लेटफॉर्म – सोनी लिव

रेटिंग -तीन

इंडस्ट्री के बेहतरीन निर्देशकों शुमार नेशनल अवार्ड विनिंग निर्देशक विशाल भारद्वाज ने टीवी और फिल्मों के बाद अब नये माध्यम ओटीटी की ओर रख कर लिया है. उनकी वेब सीरीज चार्ली चोपड़ा द मिस्ट्री ऑफ़ सोलंग वैली से इनदिनों स्ट्रीम कर रही है. टीवी शो, फिल्मों के बाद वेब सीरीज के लिए भी उनकी प्रेरणा साहित्य ही बना है. उनकी यह सीरीज अगाथा क्रिस्टी के एक जासूसी नॉवेल पर आधारित है. 19 वीं सदी के शुरुआत में लिखे गए इस नॉवेल को भारतीय परिवेश में ढालना आसान नहीं था, लेकिन विशाल भारद्वाज को इसमें महारत हासिल है, एक बार फिर इस बात को उन्होंने सीरीज में साबित किया है. इस सीरीज की कहानी में ट्विस्ट एंड टर्न के साथ साथ ह्यूमर ,संगीत और किरदारों को पर्दे पर उन्होंने देशी टच के साथ प्रस्तुत किया है. जिस वजह से कुछ खामियों के बावजूद यह सीरीज को एंगेजिंग हुए एंटरटेनिंग बना गया है.


हत्या की साजिश का पर्दाफाश करती कहानी

सीरीज की कहानी की बात करें तो यह चारुलाता उर्फ़ चार्ली चोपड़ा ( वामिका गब्बी ) की कहानी है. जो सोलंग वैली में अपने मंगेतर जिम्मी नौटियाल ( विवान शाह ) को बचाने के लिए आयी है, क्योंकि उस पर उसके अमीर रिश्तेदार बिग्रेडियर मेहरबान ( गुलशन ग्रोवर ) की हत्या करने का आरोप लगा है. सबूत उसके खिलाफ है. वह पुलिस की हिरासत में है. पुलिस इस मामले को आनन फ़ानन में बस खत्म करना चाह रही है, लेकिन अपनी डिटेक्टिव चार्ली चोपड़ा अपने तरीके से इस मामले की तह तक जाने में जुटी है ताकि वह असली क़ातिल को पकड़कर अपने मंगेतर को बचा सके. जिसमे वह बिग्रेडियर की फॅमिली, दोस्तों से लेकर शुभचिंतकों सभी की पड़ताल करती है. इस दौरान उसे कई चौंकाने वाले राज मालूम पड़ते हैं क्या ये राज उसे असल क़ातिल तक पहुंचा देंगे. इसी बीच और क़त्ल भी होने लगते हैं. क्या चार्ली इस सबका पता लगा पाएगी. यही छह एपिसोड़ की यह कहानी कहती है।सीरीज के आखिर में इसके सीक्वल का रास्ता भी रख छोड़ा गया है, ताकि मेकर्स सीरीज की क़ामयाबी के बाद आगे यह रास्ता तय कर लें.

सीरीज की खूबियां और खामियां

हिंदी सिनेमा में जासूसी जॉनर पर बहुत कम काम हुआ है. उसपर से महिला को शीर्ष भूमिका में रखकर गिनी – चुनी बार ही इस विधा को एक्सप्लोर किया गया है. इसके लिए विशाल भरद्वाज बधाई के पात्र हैं. सीरीज की शुरुआत जादू टोने के साथ होती है. जिसमे एक तांत्रिक भविष्यवाणी करता है कि बिग्रेडियर की मौत होने वाली है. यह सीरीज को अलग रंग देता है, लेकिन जैसे – जैसे सीरीज आगे बढ़ती है. यह सिर्फ एंगेज ही नहीं करती है बल्कि मनोरंजन भी करने लगती है. सीरीज में ह्यूमर भी है,जो विशाल भरद्वाजके सिनेमा की खासियत रहा है. कहानी को जिस अंदाज से परदे पर कहा गया है आप खुद एक इस पहेली को सुलझाने में जुट जाते हैं कि कातिल कौन है. इस सीरीज का लगभग हर किरदार ग्रे हैय जिसमे ज़्यादातर अभिनय के खास नाम हैय जो इस मर्डर मिस्ट्री को दिलचस्प बनाते है क्योंकि इसके बाद हर किरदार पर शक तो बनता हैय कहानी सिर्फ इन्वेस्टीगेशन पर नहीं है बल्कि चार्ली सहित कई किरदारों की बैक स्टोरी को भी खुद में समेटे हुए हैय सीरीज का म्यूजिक भी उम्दा बन पड़ा हैय खामियों की बात करें तो सीरीज की कहानी बीच के दो एपिसोड में खिंच गयी है। इस सीरीज का लोकेशन एक किरदार की तरह अहम भूमिका निभाते हैं, जो इस रहस्य से भरी सीरीज में राज को और गहराने का काम कर रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर सीरीज डार्क स्क्रीन पर शूट हुई है.जिससे फोकस करना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा सीरीज को देखते हुए यह बात भी कई बार महसूस होती है कि सीरीज में अभिनय के कई खास नाम हैंय उन्हें कहानी में थोड़ा और स्पेस मिलना चाहिए था.

सीरीज की कास्टिंग है कमाल

वामिका गब्बी ओटीटी के क्षेत्र में एक के बाद एक प्रोजेक्टस से अपनी सशक्त उपस्थिति बनाती जा रही हैं. यह सीरीज इसकी अगली कड़ी है. निर्माता निर्देशक विशाल भारद्वाज के साथ ये उनका तीसरा प्रोजेक्ट है,लेकिन लीड चेहरा वह पहली बार बनी है. एक अभिनेता के रूप में उन पर इतना भरोसा क्यों किया है. सीरीज को देखने के बाद ये बात साफ हो जाती है, जिस तरह से वह चार्ली का किरदार निभाती है, उसमें एक सहजता है,जो बहुत खास है. इसके साथ ही सीरीज में वह सीधे तौर पर दर्शकों से संवाद स्थापित करती हैं. यह प्रयोग बहुत कम कलाकार इतने सधे अंदाज़ में कर पाते हैं. टेलीफोन पर बात करने वाला दृश्य उनके अभिनय के रेंज को बखूबी दर्शाता है. वामिका के बाद प्रियांशु अभिनेता के तौर पर ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रहे हैं. नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह,गुलशन ग्रोवर और नीना गुप्ता अपनी मौजुदगी से सीरीज को दिलचस्प बनाया हैं. लारा दत्ता और अधिक स्क्रीन टाइम की हकदार थी. बाकी के दूसरे कलाकारों ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है.

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लेखक के बारे में

Author: कोरी

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