WB : आठवीं की वार्षिक परीक्षा में पूछा गया प्रश्न, सिंगूर में सबसे पहले किसने सरसों का बीज बोया 'सवाल पर बवाल'

सिंगूर के भाजपा नेता मधुसूदन दास का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में सिंगूर आंदोलन का इतिहास पढ़ा विद्यार्थियों को पंगु बनाया जा रहा है. उक्त आंदोलन में जिनका नाम है, उनमें से कई भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं.

पश्चिम बंगाल के हुगली के सिंगूर गोलाप मोहिनी मल्लिक गर्ल्स हाई स्कूल में आठवीं की वार्षिक परीक्षा-2023 में एक सवाल पूछा गया कि सिंगूर में सरसों का बीजरोपण सर्वप्रथम किसने किया ? इस पर विवाद खड़ा हो गया है. कई अभिभावकों ने स्कूल जाकर इस पर सवाल उठाया. भाजपा ने भी कड़ी आपत्ति जतायी है. वहीं, स्कूल शिक्षकों का तर्क है कि उक्त सवाल सिलेबस से है. यह प्रश्न पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की आठवीं की पुस्तक अतीत और विरासत से है. इसमें एक अध्याय है- कृषि भूमि अधिकार सिंगूर गण आंदोलन. पाठ्यक्रम में सिंगूर में टाटा कार फैक्ट्री पर केंद्रित भूमि अधिग्रहण, किसान आंदोलन और भूमि बहाली सहित आंदोलन के विभिन्न पहलु भी शामिल है. इस बात पर पहले भी विवाद रहा है कि सिंगूर आंदोलन को पाठ्यक्रम में क्यों शामिल किया गया है.


अभिभावकों ने जतायी नाराजगी, भाजपा की भी कड़ी आपत्ति

सिंगूर के भाजपा नेता मधुसूदन दास का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में सिंगूर आंदोलन का इतिहास पढ़ा विद्यार्थियों को पंगु बनाया जा रहा है. उक्त आंदोलन में जिनका नाम है, उनमें से कई भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं. सिंगूर ब्लॉक तृणमूल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद धारा ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिंगूर की जमीन वापस मिलने के बाद अक्टूबर 2016 में सबसे पहले वहां सरसों का बीजा बोया था. यह पाठ्यपुस्तक में है. इसमें से ही प्रश्न पूछा गया है. हालांकि, प्रिंटिंग मिस्टेक के कारण प्रश्न में कुछ त्रुटि रह गयी. गौरतलब है कि बंगाल में भाजपा व तृणमूल के बीच जुबानी जंग जारी है.

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By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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