कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष सोमवार (12 जुलाई) को पहली बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात करेंगे. दिलीप घोष की जेपी नड्डा से रविवार को ही मुलाकात होनी थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से इसे टाल दिया गया. खबर है कि आज शाम को दोनों नेताओं की मुलाकात होगी और उसमें प्रदेश के संगठन में फेरबदल पर चर्चा होगी.
सूत्रों ने बताया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में प्रदेश स्तर पर व्यापक संगठनात्मक फेरबदल की संभावना है. सूत्र यह भी बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में प्रदेश भाजपा अन्य दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल करने के लिए स्क्रीनिंग विंडो बनाने की तैयारी कर रही है. साथ ही तृणमूल कांग्रेस की नीतियों का मुकाबला करने के लिए अखिल भारतीय नीति के साथ विशिष्ट राजनीतिक लाइन अपनाने पर विचार कर रही है.
भाजपा ने पार्टी के कुशल कार्यकर्ताओं व नेताओं को पुरस्कृत करके संगठन को नया रूप देने और स्थानीय और जिला स्तर के कई दलबदलुओं को हटाने का फैसला किया है. पार्टी ने दोतरफा दृष्टिकोण के साथ असंतोष पर लगाम लगाने का भी फैसला किया है.
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चुनाव में मिली हार, चुनाव में हार के बाद बढ़ते अंदरूनी कलह और नेताओं-कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने के मामलों को देखते हुए ये कदम उठाये जायेंगे. हाल ही में मुकुल रॉय भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में लौट गये. भाजपा के सूत्र बताते हैं कि विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ा है.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच अनबन जारी है. वे एक-दूसरे को विधानसभा चुनाव में मिली हार के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि संगठन के विभिन्न स्तरों पर कुछ बदलाव के लिए चर्चा चल रही है. कुछ मुद्दे हैं. ऐसी स्थिति नहीं आती, तो बेहतर होता.
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यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा के खिलाफ खुलकर बोलनेवाले असंतुष्टों के खिलाफ पार्टी कार्रवाई करेगी, श्री घोष ने कहा कि पार्टी में अनुशासन से बढ़कर कुछ नहीं है. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो भाजपा के सत्ता में आने पर कुछ पाने की उम्मीद में पार्टी में शामिल हुए थे. अब उनके सुर बदल गये हैं. कहा कि सभी को पार्टी के नियमों और अनुशासन का पालन करना होगा.
सोनाली समेत कई नेता तृणमूल में वापसी चाहते हैं
पार्टी सूत्रों की मानें, तो कई बड़े नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है, फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. इससे पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ रहा है. सोनाली गुहा, सरला मुर्मू, दीपेंदु विश्वास जैसे कुछ नेता तृणमूल में लौटना चाहते हैं.
यही वजह है कि विधानसभा चुनाव की गलतियों से सबक लेते हुए भाजपा ने एक स्क्रीनिंग टीम बनाने का फैसला किया है. आगामी दिनों में पार्टी में शामिल होने के किसी भी इच्छुक व्यक्ति के लिए स्क्रीनिंग टीम की सहमति अनिवार्य होगी.
Posted By: Mithilesh Jha
