Saraswati Puja 2023: मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे मूर्तिकार, किन मूर्तियों की डिमांड है अधिक ?

मूर्तिकार क्रमदेव चौधरी ने बताया कि मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है. कई शिक्षण संस्थान के शिक्षकों द्वारा मां की प्रतिमा की सुंदरता देखकर पहले ही बुकिंग कर ली गयी है. कई लोग अभी भी ऑर्डर दे रहे हैं.

डंडई (गढ़वा), रमेश कुमार. सरस्वती पूजा इस बार 26 जनवरी को है. इसे लेकर लोगों में काफी उत्साह है. इस बीच मूर्तिकार मां सरस्वती की प्रतिमा तराशने में लगे हुए हैं और उसे अंतिम रूप देने में जुटे हैं. गढ़वा के डंडई में बंगाल से ट्रेनिंग लेकर आये मूर्तिकार ने एक से बढ़कर एक मूर्ति बनायी है. छोटी मूर्तियों की डिमांड अधिक है. मूर्तिकार कहते हैं कि अब पहले जैसी आमदनी नहीं है.

एक से बढ़कर एक बन रहीं मूर्तियां

इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों के मूर्तिकार एक से बढ़कर एक भव्य मूर्ति बना रहे हैं. कड़ाके की ठंड में भी मां की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं. बाहर से सीखकर आये मूर्तिकार क्रमदेव चौधरी ने बताया कि मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है. कई शिक्षण संस्थान के शिक्षकों द्वारा मां की प्रतिमा की सुंदरता देखकर पहले ही बुकिंग कर ली गयी है. कई लोग अभी भी ऑर्डर दे रहे हैं.

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पहले जैसी आमदनी नहीं

मूर्तियों की बनावट के अनुसार उसका मूल्य निर्धारित किया गया है. 500 रुपये से लेकर 3500 रुपये तक की मूर्तियां बनायी गयी हैं. कई शिक्षण संस्थानों में छोटी-छोटी मूर्तियों की डिमांड रहती है. इसलिए अधिकतर मूर्तियां छोटी-छोटी ही बनाई जाती हैं. कमेटियों, क्लबों द्वारा डिमांड के अनुसार बड़ी मूर्तियां भी बनाई जाती हैं. मूर्ति निर्माण से जुड़े कारीगर बैजनाथ चौधरी ने बताया कि पहले इस धंधे में ज्यादा आमदनी होती थी, परंतु अब कारीगरों की संख्या बढ़ जाने से पहले जैसी आमदनी नहीं है.

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सरस्वती पूजा को लेकर लोगों में उत्साह

26 जनवरी को सरस्वती पूजा के आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह देखा जा रहा है. मां सरस्वती की पूजा-अर्चना विद्यालयों के साथ-साथ कोचिंग संस्थानों में भी की जाती है. क्लबों के द्वारा भी सरस्वती पूजा धूमधाम से मनायी जाती है. विद्या की देवी सरस्वती माता की पूजा-अर्चना माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी बसंत पंचमी को की जाती है. इस बार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के साथ बसंत पंचमी भी है.

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