WB News : दिवाली के एक दिन बाद कोलकाता में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में पहुंची

प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, तो इससे सांस संबंधी समस्याएं पैदा होंगी. एक अन्य पर्यावरण कार्यकर्ता सोमेंद्र मोहन घोष ने कहा, हम प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए शाम को पौधों पर पानी छिड़कने की सलाह देते हैं.

काली पूजा और दिवाली के एक दिन बाद सोमवार सुबह कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ रही और महानगर में धुंध छाई रही. अधिकारियों ने बताया कि वायु गुणवत्ता के खराब होने की एक मात्र वजह रविवार को हुई आतिशबाजी ही नहीं, बल्कि मौजूदा मौसम भी है. इस मौमस में कोहरे और धुएं की उपस्थिति के कारण छोटे कण हवा में बने रहते हैं.

पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डब्ल्यूबीपीसीबी) के आंकड़ों से पता चलता है कि सोमवार सुबह ‘विक्टोरिया मेमोरियल’ में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 284 और कोलकाता के ‘फोर्ट विलियम’ में 262 दर्ज किया गया, जबकि पड़ोसी हावड़ा जिले के घुसुरी में यह 310 रहा.एक्यूआई शून्य से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 450 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है. एक्यूआई के 450 से ऊपर हो जाने पर इसे ‘अति गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है.

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उन्होंने बताया कि डब्ल्यूबीपीसीबी के मुख्यालय ‘परिवेश भवन’ स्थित नियंत्रण कक्ष रविवार देर रात तक निगरानी कार्य में लगा रहा, जबकि शहर और आस-पास के इलाकों में ड्रोन से निगरानी की गई. पर्यावरणविद नबा दत्ता ने कहा कि रविवार को सूर्यास्त के बाद जैसे ही शहर के विभिन्न शहरों में आतिशबाजी शुरू हुई प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया. उन्होंने आगाह किया अगर प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, तो इससे सांस संबंधी समस्याएं पैदा होंगी. एक अन्य पर्यावरण कार्यकर्ता सोमेंद्र मोहन घोष ने कहा, हम प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए शाम को पौधों पर पानी छिड़कने की सलाह देते हैं.

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By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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