कैसे Sam Altman ChatGPT को चला रहे हैं, सिर्फ 5% यूजर करते हैं भुगतान, बाकी का खर्च कौन उठाता है?

ChatGPT के करोड़ों यूजर्स हैं, पर भुगतान करने वाले सिर्फ 5% हैं. जानिए कैसे OpenAI इस AI टूल को चलाने का भारी खर्च उठाता है. कंपनियों और API का क्या है रोल?

ChatGPT आज दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले AI टूल्स में शामिल है. करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल सवाल पूछने, पढ़ाई, लिखने, कोडिंग और तस्वीरें बनाने जैसे कामों के लिए करते हैं. लेकिन ChatGPT की कमाई को लेकर एक हैरान करने वाली बात सामने आती है. 2025 में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 3.5 करोड़ लोग ही ChatGPT Plus और Pro जैसी सेवाओं के लिए भुगतान कर रहे थे. यह उस समय ChatGPT के साप्ताहिक यूजर्स का करीब 5 फीसदी था.

इसका मतलब है कि ChatGPT इस्तेमाल करने वाले करीब 95 फीसदी लोग सीधे किसी सदस्यता के लिए OpenAI को पैसे नहीं दे रहे थे. ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े स्तर पर ChatGPT को चलाने का खर्च आखिर कौन उठा रहा है.

ChatGPT को चलाने में करोड़ों डॉलर का खर्च

ChatGPT पर जब कोई यूजर सवाल पूछता है, तो जवाब तैयार करने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग व्यवस्था का इस्तेमाल होता है. इसके लिए शक्तिशाली कंप्यूटर, ग्राफिक्स प्रोसेसर, डेटा सेंटर, नेटवर्क और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है.

हर सवाल के जवाब के लिए AI मॉडल को गणना करनी पड़ती है. इसे AI Inference कहा जाता है. जब एक साथ करोड़ों लोग ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खर्च काफी बढ़ जाता है.

OpenAI के CEO Sam Altman ने भी एक बार ChatGPT पर यूजर्स के "please" और "thank you" कहने से होने वाले खर्च पर मजाकिया अंदाज में कहा था कि यह रकम करोड़ों डॉलर तक पहुंचती है. हालांकि यह OpenAI की आधिकारिक लागत का आंकड़ा नहीं था.

फिर OpenAI की कमाई कहां से होती है?

ChatGPT का पूरा कारोबार सिर्फ Plus और Pro सदस्यता पर निर्भर नहीं है. OpenAI के पास कमाई के कई दूसरे रास्ते भी हैं.

कमाई का जरियाOpenAI को पैसा कैसे मिलता है
ChatGPT सदस्यतायूजर्स हर महीने शुल्क देते हैं
कारोबारी ग्राहककंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए AI सेवाएं लेती हैं
APIडेवलपर अपने ऐप में OpenAI के AI मॉडल इस्तेमाल करते हैं
विज्ञापनबड़े मुफ्त यूजर आधार से कमाई का नया जरिया
दूसरी सेवाएंनए AI उत्पादों और सेवाओं से आय

कंपनियां भी देती हैं OpenAI को पैसा

ChatGPT का इस्तेमाल सिर्फ आम यूजर्स ही नहीं करते. बड़ी संख्या में कंपनियां भी OpenAI की AI सेवाओं का इस्तेमाल करती हैं.

कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए ChatGPT की सेवाएं खरीद सकती हैं. इसके अलावा डेवलपर OpenAI के API की मदद से अपने ऐप और दूसरी सेवाओं में AI मॉडल जोड़ सकते हैं.

इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति ने OpenAI को सीधे कोई पैसा नहीं दिया हो, फिर भी उसके इस्तेमाल से OpenAI को कमाई हो सकती है. उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसे ऐप का इस्तेमाल करता है जिसमें OpenAI का AI मॉडल लगा है, तो उस ऐप की कंपनी OpenAI को भुगतान कर सकती है.

मुफ्त यूजर भी OpenAI के लिए जरूरी हैं

मुफ्त में ChatGPT इस्तेमाल करने वाले यूजर्स OpenAI के लिए सिर्फ खर्च नहीं हैं. यही बड़ा यूजर आधार ChatGPT को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद करता है.

इनमें से कुछ लोग आगे चलकर भुगतान करने वाले ग्राहक बन सकते हैं. कुछ लोग अपने काम में ChatGPT का इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं कई लोग ऐसे ऐप और सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं जिनमें OpenAI के मॉडल पहले से जुड़े होते हैं.

इस तरह मुफ्त यूजर्स भी OpenAI के पूरे कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.

ChatGPT में Ads से कमाई बढ़ाने की तैयारी

OpenAI ने ChatGPT के मुफ्त यूजर्स से कमाई बढ़ाने के लिए विज्ञापन को भी अपने कारोबार का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है. इसका मकसद उन करोड़ों यूजर्स से कमाई करना है जो ChatGPT का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन Plus या Pro जैसी भुगतान वाली सेवाएं नहीं लेते. विज्ञापन के जरिए OpenAI मुफ्त सेवा इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के बड़े आधार को कमाई में बदल सकता है, जबकि भुगतान करने वाले यूजर्स के लिए अलग सुविधाएं जारी रखी जा सकती हैं.

Sam Altman के सामने सबसे बड़ी चुनौती

ChatGPT के करोड़ों यूजर्स होना OpenAI के लिए बड़ी ताकत है, लेकिन इतने बड़े यूजर आधार को चलाना भी आसान नहीं है.

जितने ज्यादा लोग ChatGPT इस्तेमाल करेंगे, उतनी ज्यादा कंप्यूटिंग शक्ति की जरूरत होगी.

ज्यादा यूजर → ज्यादा सवाल → ज्यादा कंप्यूटिंग → ज्यादा खर्च

OpenAI को इसी के साथ अपनी कमाई भी बढ़ानी है, ताकि AI सेवाओं को लंबे समय तक बड़े स्तर पर चलाया जा सके.

क्या आज भी सिर्फ 5 फीसदी यूजर ही भुगतान करते हैं?

यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है. 5 फीसदी का आंकड़ा 2025 के आसपास की रिपोर्टों पर आधारित था. ChatGPT के यूजर्स और भुगतान करने वाले ग्राहकों की संख्या इसके बाद बढ़ी है.

इसलिए आज ChatGPT के ठीक 5 फीसदी यूजर ही भुगतान करते हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा. फिर भी इससे यह जरूर पता चलता है कि ChatGPT का बहुत बड़ा यूजर आधार मुफ्त सेवा का इस्तेमाल करता है.

आखिर आपके मुफ्त ChatGPT का खर्च कौन उठाता है?

इसका जवाब सिर्फ भुगतान करने वाले ChatGPT यूजर्स नहीं हैं. OpenAI को सदस्यता के अलावा कंपनियों, डेवलपर्स और दूसरे कारोबारी स्रोतों से भी कमाई होती है. इसके साथ ही कंपनी में होने वाला निवेश भी उसके विस्तार और बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में मदद करता है.

यानी अगर आप ChatGPT का मुफ्त इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कोई दूसरा यूजर अकेले आपके इस्तेमाल का खर्च चुका रहा है. OpenAI का पूरा कारोबार अलग अलग कमाई के जरियों पर आधारित है.

Sam Altman के सामने असली चुनौती अब सिर्फ ज्यादा से ज्यादा लोगों को ChatGPT तक पहुंचाना नहीं है, बल्कि इतने बड़े मुफ्त यूजर आधार को एक टिकाऊ कारोबार में बदलना भी है.

FAQs

क्या ChatGPT के ज्यादातर यूजर इसके लिए पैसे देते हैं?

नहीं. 2025 के आंकड़ों के मुताबिक करीब 5% यूजर ही ChatGPT की पेड सदस्यता के लिए भुगतान कर रहे थे, जबकि बाकी लोग मुफ्त सेवा का इस्तेमाल कर रहे थे.

मुफ्त यूजर का खर्च OpenAI कैसे उठाता है?

OpenAI को ChatGPT की सदस्यता के अलावा कंपनियों से मिलने वाली कमाई, API सेवाओं, विज्ञापन और दूसरी AI सेवाओं से भी आय होती है. इससे मुफ्त यूजर को सेवा देने का खर्च संभालने में मदद मिलती है.

क्या 5% भुगतान करने वाले यूजर का आंकड़ा अभी भी यही है?

जरूरी नहीं. 5% का आंकड़ा 2025 के आसपास की रिपोर्टों पर आधारित था. यूजर और पेड ग्राहकों की संख्या लगातार बदल रही है, इसलिए इसे मौजूदा और स्थायी आंकड़ा नहीं माना जा सकता.

ये भी पढ़ें: GPT-6 Astra से Blender में बना सकेंगे 3D मॉडल और गेम एसेट, ऐसे करेगा काम

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By संतोष कुमार

संतोष कुमार एक स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर हैं। उनकी रुचि के प्रमुख क्षेत्रों में साइबर सिक्योरिटी, IoT सिक्योरिटी, सैटेलाइट सिक्योरिटी, एथिकल हैकिंग, वल्नरेबिलिटी रिसर्च और डिजिटल फोरेंसिक शामिल हैं। वे टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी कम्युनिटी में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और सिक्योरिटी रिसर्च, वल्नरेबिलिटी एनालिसिस तथा उभरती हुई तकनीकों पर नियमित रूप से काम करते हैं।

उन्होंने IBM, Google, Microsoft और Apple जैसी प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़े सिक्योरिटी रिसर्च और वल्नरेबिलिटी रिसर्च पर भी काम किया है। संतोष कुमार साइबर सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और उभरते ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं। उनके लेख जटिल तकनीकी विषयों को सरल और आसानी से समझ आने वाली भाषा में प्रस्तुत करने पर केंद्रित होते हैं।

वे लगातार टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी के नए क्षेत्रों को एक्सप्लोर करते रहते हैं, जिसमें IoT, सैटेलाइट सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कनेक्टेड टेक्नोलॉजी की सिक्योरिटी में उनकी विशेष रुचि है।

If you spot an error, have feedback, or simply want to say hi, you'll find me at
Mail :

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >