Cooler चलाते ही हो रही चिपचिपी गर्मी? कमरे से दूम दबाकर भागेगा उमस, बस रख दें यह सफेद पाउडर

Cooler Hacks: मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी के कारण जब कमरे में कूलर चलाया जाता है तो अक्सर चिपचिपाहट महसूस होने लगती है. लेकिन क्या आप जानती हैं कि इस मौसम में यह परेशानी बेकिंग सोडा की मदद से कम की जा सकती है? आज हम आपको बताएंगे कैसे, आइए जानते हैं.

Cooler Hacks: जुलाई का महिना शुरू होने वाला है यानि बारिश झमाझम होने वाली है. बारिश के समय हवा में नमी होने के कारण उमस बढ़ जाती है और चिपचिप वाली गर्मी लगने लगती है. इस चिपचिपी गर्मी को दूर करने के लिए अक्सर हम कूलर का इस्तेमाल करते है लेकिन यही कूलर परेशानी का कारण बनने लगता है. मानसून और बरसात के मौसम में कूलर की हवा से ठंडक तो कम मिलती है, लेकिन उमस और चिपचिपाहट काफी बढ़ जाती है.

इस उमस और चिपचिपाहट को दूर करने के लिए हम आपके लिए एक आसान और कारगर उपाय लेकर आए हैं. यह उपाय कोई महंगी चीज नहीं बल्कि बेकिंग सोडा से जुड़ा है. जी हां, बस आपको कूलर वाले कमरे में बेकिंग सोडा रखना है. शायद सुनकर थोड़ा अजीब लगे, लेकिन बेकिंग सोडा का इस्तेमाल इस स्थिति में काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

अब सवाल यह उठता है कि आखिर बेकिंग सोडा कमरे की उमस और चिपचिपाहट को कैसे कम करता है. आइए, जानें इसके फायदे और यह कैसे आपकी मानसून में होने वाली परेशानी को कम कर सकता है.

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बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर में फर्क समझें

फायदे जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर में फर्क होता है. हालांकि इनका उपयोग काफी हद तक समान दिखाई देता है, लेकिन बेकिंग सोडा में मुख्य रूप से सोडियम बाइकार्बोनेट पाया जाता है. यह न सिर्फ खाना पकाने में काम आता है, बल्कि घर के कई छोटे-बड़े कामों को आसान बनाने में भी सहायक होता है.

Cooler वाले कमरे में बेकिंग सोडा रखने के फायदे

नमी सोखना

बेकिंग सोडा में मौजूद सोडियम बाइकार्बोनेट हवा में मौजूद नमी को अपने अंदर रोक लेता है. इसी कारण कमरे की उमस का स्तर घटता है जिससे कूलर की हवा कम चिपचिपी लगती है और माहौल थोड़ा ज्यादा आरामदायक महसूस होता है.

बदबू दूर करना

मानसून के दौरान लगातार बारिश के चलते हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है जिससे घरों में सीलन और फफूंदी जैसी समस्याएं बढ़ जाती है. ये समस्याएं अक्सर खराब गंध का कारण बनती हैं जो कूलर की हवा के साथ पूरे कमरे में फैल जाती है और असुविधा पैदा करती है. ऐसी स्थिति में कई लोग बेकिंग सोडा का सहारा लेते हैं, जिसे कमरे में रखने से नमी और दुर्गंध को कम करने में मदद मिलती है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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