भारत में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी सस्पेंस और कड़े सरकारी एक्शन के बाद आखिरकार लोकप्रिय मैसेजिंग प्लैटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) की गूगल प्ले स्टोर पर वापसी हो गई है. नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में दोबारा पेपर लीक होने की आशंका को रोकने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध की अवधि समाप्त होते ही टेक दिग्गज गूगल ने इसे अपने प्लैटफॉर्म पर बहाल कर दिया. हालांकि, ऐप स्टोर से हटाए जाने के बाद भी यह ऐप पहले से मौजूद यूजर्स के फोन में काम कर रहा था, लेकिन नए डाउनलोड्स पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी. इस पूरे घटनाक्रम ने देश के तकनीकी जगत और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है.
नीट परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने उठाया था अभूतपूर्व कदम
दरअसल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को लेकर देश में मचे बवाल के बीच सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया था. बीते मई महीने में हुई मुख्य परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र लीक होने के गंभीर आरोपों के बाद सरकार ने उस परीक्षा को रद्द कर दिया था. इसके बाद 21 जून को आयोजित हुई नीट की पुनर्परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए गूगल और ऐपल को 22 जून तक टेलीग्राम को अपने-अपने स्टोर से हटाने का आदेश दिया था, ताकि इस प्लैटफॉर्म के जरिए किसी भी तरह की अनधिकृत सामग्री या लीक पेपर का प्रसार न हो सके.
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मैसेज एडिट करने पर अभी भी रहेगी पाबंदी, साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने की तैयारी
प्ले स्टोर पर टेलीग्राम की वापसी भले ही हो गई हो, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से ऐप पर अभी भी एक बड़ी बंदिश लागू है. सरकार ने एक अलग विशेष निर्देश जारी कर टेलीग्राम को आगामी 30 जून तक भारत में ‘मैसेज एडिटिंग’ (संदेशों को बदलने) की सुविधा को पूरी तरह ब्लॉक रखने के लिए कहा है. इस कड़े कदम के पीछे सरकार का मुख्य मकसद यह है कि पेपर लीक या किसी भी तरह की धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में अगर कोई संदिग्ध बातचीत हुई हो, तो आरोपी डिजिटल सबूतों और साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या उन्हें डिलीट न कर सकें. इस डिजिटल सेंसरशिप पर सरकार ने बैन लगाने से पहले जून की शुरुआत में ही टेलीग्राम के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया था.
टेलीग्राम के सीईओ ने उठाए सवाल; रिलायंस और व्हाट्सऐप पर लगाया गंभीर आरोप
इस पूरे विवाद ने उस समय एक नया मोड़ ले लिया जब टेलीग्राम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) पावेल ड्यूरोव ने भारत सरकार के इस एक हफ्ते के कड़े प्रतिबंध की सार्वजनिक रूप से तीखी आलोचना की. ड्यूरोव का स्पष्ट मानना था कि इस तरह के अस्थाई प्रतिबंधों से पेपर लीक जैसी जमीनी समस्याओं को नहीं रोका जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा करते हुए आरोप लगाया कि भारत के बड़े औद्योगिक घराने रिलायंस समूह ने प्रतिद्वंद्वी मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (मेटा) के साथ मिलकर इस प्रतिबंध के लिए सरकार के सामने लॉबिंग की थी. गौरतलब है कि मेटा प्लैटफॉर्म्स की रिलायंस के डिजिटल बिजनेस में हिस्सेदारी है, जिसके कारण इन आरोपों ने कॉरपोरेट जगत में भी हलचल तेज कर दी है.
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