भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को मेटाप्लैटफॉर्म्स और उसकी मैसेजिंग सेवा व्हाट्सऐप को कड़ी चेतावनी दी है. अदालत ने साफ कहा कि व्हाट्सऐप यूजर डेटा को विज्ञापन के लिए साझा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने मेटा से एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह स्पष्ट Undertaking हो कि कंपनी किसी भी तरह से यूजर डेटा का विज्ञापन में उपयोग नहीं करेगी.
अदालत की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सुर्या कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि मेटा शपथपत्र दाखिल करने से पीछे हटता है तो मामला सीधे खारिज कर दिया जाएगा. अदालत ने कहा- “हम एक शब्द भी डेटा साझा करने की इजाजत नहीं देंगे. यह बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए.”
पॉलिसी की भाषा पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर भी सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि आम यूजर, खासकर सड़क पर फल बेचने वाली महिला जैसी साधारण नागरिक, इन शर्तों को समझ ही नहीं सकती. कोर्ट ने पॉलिसी को “चालाकी से तैयार किया गया” बताया और कहा कि इसमें ऑप्ट-इन और ऑप्ट-आउट विकल्प आम जनता के लिए समझना मुश्किल है.
लंबा विवाद और जुर्माना
यह विवाद 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसमें व्हाट्सऐप ने यूजर्स को मजबूर किया था कि वे मेटा कंपनियों के साथ अधिक डेटा साझा करें. प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने नवंबर 2024 में मेटा और व्हाट्सऐप पर ₹213.14 करोड़ का जुर्माना लगाया था. एनसीएलएटी ने भी इस जुर्माने को बरकरार रखा, हालांकि पांच साल की डेटा शेयरिंग रोक को हटा दिया. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जहां अंतिम फैसला होगा कि व्हाट्सऐप यूजर डेटा को किस हद तक साझा कर सकता है.
आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मेटा को एक सप्ताह का समय दिया है. अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि व्हाट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी भारतीय यूजर्स के हितों के खिलाफ है या नहीं.
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