अब फोटोकॉपी शॉप की लाइन में लगने की जरूरत नहीं, स्मार्ट मशीन क्यूआर स्कैन करने से तुरंत देगी प्रिंट

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के बाद चर्चा में आई प्रिंट बडी मशीन. क्यूआर स्कैन कर फोन से डॉक्यूमेंट अपलोड करें और तुरंत प्रिंट पाएं. प्राइवेसी का भी पूरा ध्यान रखा गया है.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक एक्स पोस्ट के अनुसार, भारत में एक नई तकनीक ने प्रिंटिंग के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. पुणे की एक स्टार्टअप ने ऐसी मशीन बनाई है जिसमें बिना किसी कर्मचारी की मदद के सिर्फ फोन से डॉक्यूमेंट प्रिंट किए जा सकते हैं. क्यूआर कोड स्कैन करके फाइल अपलोड करें, रंग या काला-सफेद चुनें और पेमेंट करते ही प्रिंट तैयार। छात्रों और आम लोगों के लिए यह सुविधा काफी राहत भरी साबित हो रही है.

कैसे काम करती है यह मशीन

सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर @SitamarhiJila हैंडल से यह पोस्ट किया गया है. इसके मुताबिक, प्रिंट बडी नाम की इस कियोस्क मशीन का इस्तेमाल बेहद आसान है. मशीन पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही फोन पर ऐप खुल जाता है. यूजर अपनी फाइल अपलोड करता है और प्रिंट के विकल्प चुनता है. कलर या ब्लैक एंड व्हाइट, कॉपी की संख्या जैसी सेटिंग्स तय करने के बाद यूपीआई से पेमेंट कर दी जाती है. इसके बाद मशीन खुद प्रिंट निकालने लगती है. पूरा प्रॉसेस कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है.

यहां देखें पोस्ट

प्राइवेसी का खास ध्यान

इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह यूजर के डॉक्यूमेंट्स को स्थायी रूप से सेव नहीं करती. प्रिंट होने के बाद फाइल सिस्टम से हट जाती है. इससे संवेदनशील दस्तावेजों की प्राइवेसी बनी रहती है. कॉलेज, ऑफिस या सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल के लिए यह फीचर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

कहां-कहां मिल रही है सुविधा?

प्रिंट बडी फिलहाल कई कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जा रही है. एचपी जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी के चलते मशीन की प्रिंट क्वालिटी भी अच्छी बताई जा रही है. स्टार्टअप का मकसद देश भर में ऐसे सेल्फ-सर्विस प्रिंटिंग पॉइंट्स बढ़ाना है, ताकि लोगों को दुकान ढूंढने और लाइन में लगने की झंझट से छुटकारा मिले.

स्टूडेंट्स और आम लोगों के लिए फायदेमंद

असाइनमेंट, फॉर्म, सर्टिफिकेट या अन्य दस्तावेज प्रिंट कराने के लिए अब देर रात तक दुकान खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. यह मशीन 24 घंटे उपलब्ध रहने की क्षमता रखती है. छोटे शहरों और कैंपस एरिया में इसकी डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. तकनीक ने एक बार फिर रोजमर्रा के छोटे काम को आसान बना दिया है.

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By राजीव कुमार

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जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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