मोबाइल फोन के सोर्स कोड शेयर करने वाली रिपोर्ट निकली भ्रामक, सरकार ने PIB फैक्ट-चेक के जरिए X पर किया पोस्ट

PIB फैक्ट-चेक ने उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि भारतीय सरकार Apple और Samsung जैसी बड़ी कंपनियों से उनके स्मार्टफोन का सोर्स कोड मांग रही है. MeitY ने साफ किया कि ये सिर्फ नियमित सलाह-मशवरे हैं और ऐसा कोई आदेश या मंजूरी नहीं है.

By Ankit Anand | January 12, 2026 1:54 PM

Smartphone Source Code: कल यानी 11 जनवरी को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दवा किया गया था कि भारत एक ऐसा प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है, जिसमें स्मार्टफोन कंपनियों को सोर्स कोड शेयर करना जरूरी होगा. सरकार ने उस रिपोर्ट को लेकर चुप्पी थोड़ी है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर PIB Fact Check ने साफ कहा कि यह दावा झूठा है और सरकार ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है. वहीं Reuters की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत सरकार Apple, Samsung और Xiaomi जैसी कंपनियों से डिवाइस का सोर्स कोड मांगने वाला नया सुरक्षा नियम लाने वाली है.

रिपोर्ट को सरकार ने बताया भ्रामक

PIB ने साफ किया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) मोबाइल सिक्योरिटी के लिए सही नियम बनाने को लेकर अलग-अलग लोगों और कंपनियों से बातचीत शुरू कर चुका है. यह इंडस्ट्री के साथ होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है, ताकि सेफ्टी से जुड़े स्टैंडर्ड तय किए जा सकें. पीआईबी की फैक्ट-चेक टीम ने स्पष्ट किया है कि अभी इस रूटीन स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन पर कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ है. यानी स्मार्टफोन के सोर्स कोड को लेकर जो खबरें फैल रही हैं, वे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं.

क्या होता है स्मार्टफोन के सोर्स कोड ?

मोबाइल फोन का सोर्स कोड असल में वह फाइलों का सेट होता है जिसे कोई प्रोग्रामर लिखता है. इसे Python, Java या C++ जैसी भाषा में लिखा जाता है जिसे इंसान पढ़ सके. आसान शब्दों में कहें तो ये कंप्यूटर को बताता है कि उसे हर काम कैसे करना है यानी इसका ‘ब्लूप्रिंट’ कैसे होगा. यही कोड फोन के अलग‑अलग सेंसर और फीचर्स को चलाता है. इसलिए कंपनियां इसे बहुत सीक्रेट रखती हैं, क्योंकि इसमें फोन की सेफ्टी से जुड़ी अहम जानकारी छुपी होती है.

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