सैन फ्रांसिस्को में हाल ही में एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. करीब 200 एआई सेफ्टी एक्टिविस्ट्स ने OpenAI और Anthropic के हेडक्वाॅर्टर के बाहर इकट्ठा होकर Pause the AI Race के नारे लगाये. उनका कहना है कि कंपनियां अब इंसानियत और सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे पर ध्यान दे रही हैं, जिससे नौकरियों और समाज पर गंभीर असर पड़ रहा है.
प्रदर्शनकारियों की मांगें क्या हैं
प्रोटेस्टर्स का कहना था कि ग्लोबल AI रेस को तुरंत रोका जाए. उनका आरोप है कि कंपनियां प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने के लिए लगातार नये फ्रंटियर AI मॉडल्स लॉन्च कर रही हैं, लेकिन पहले से मौजूद डीपफेकस्कैम्स और फाइनेंशियल फ्रॉड को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.
सुरक्षा बनाम मुनाफा का खेल
एक्टिविस्ट्स ने आरोप लगाया कि OpenAI जैसी कंपनियां अब नॉन-प्रॉफिट से हटकर प्रॉफिट मॉडल पर काम कर रही हैं. उनका कहना है कि टेक कंपनियों ने दुनिया को एक टेस्टिंग ग्राउंड बना दिया है, जहां इंसानियत की सुरक्षा से ज्यादा प्रतिस्पर्धा और पैसा मायने रखता है.
भारत और ग्लोबल असर
AI का असर भारत के IT और BPO सेक्टर में भी दिखने लगा है. कई नौकरियां ऑटोमेशन की वजह से खतरे में हैं. वहीं अमेरिका अभी भी AI रेगुलेशन पर संघर्ष कर रहा है, लेकिन भारत ने अपने IndiaAI गवर्नेंस गाइडलाइंस जारी कर दिये हैं, जो इनोवेशन और सुरक्षा दोनों पर ध्यान देते हैं.
अस्तित्व का खतरा और जवाबदेही
प्रोटेस्टर्स ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में ऐसे सुपर AI मॉडल्स बन गए जिन्हें इंसान नियंत्रित नहीं कर पाए, तो यह इंसानियत के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा होगा. उन्होंने कंपनियों से मांग की कि उनके CEO अपने बनाये गए AI मॉडल्स की जिम्मेदारी लें. साथ ही No Killer Robots के नारे लगाकर मिलिट्री में AI के इस्तेमाल पर भी चिंता जतायी.
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