NASA के Artemis II मिशन में iPhone 17 Pro Max क्यों ले गए एस्ट्रोनॉट्स? जानिए वजह

NASA के Artemis II मिशन में इस बार iPhone 17 Pro Max भी साथ गया है. एस्ट्रोनॉट्स इसे शानदार फोटो-वीडियो और यादगार मोमेंट्स कैद करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वो भी पूरी तरह कंट्रोल्ड तरीके से.

NASA के Artemis II मिशन में इस बार कुछ ऐसा हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ. पहली बार एस्ट्रोनॉट्स अपने साथ iPhones लेकर चांद की यात्रा पर गए हैं. लॉन्च से पहले एस्ट्रोनॉट्स को अपने स्पेस सूट में iPhones रखते हुए भी देखा गया. दरअसल, ये iPhones सिर्फ स्टाइल के लिए नहीं हैं बल्कि इनका इस्तेमाल मिशन के दौरान खास पलों को कैद करने और शानदार क्वालिटी की तस्वीरें लेने के लिए किया जाएगा. दिलचस्प बात ये है कि Jared Isaacman ने 2026 में एक नई पॉलिसी के तहत एस्ट्रोनॉट्स को अपने साथ मॉडर्न स्मार्टफोन्स ले जाने की अनुमति दी है.

Artemis II क्या है?

Artemis II एक खास स्पेस मिशन है, जो करीब 10 दिन तक चलेगा. इसमें चार एस्ट्रोनॉट्स चांद के चारों ओर घूमकर वापस धरती पर लौटेंगे. खास बात ये है कि इस मिशन में वे चांद पर लैंड नहीं करेंगे, लेकिन फिर भी ये मिशन बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई सालों बाद इंसान फिर से डीप स्पेस की तरफ बढ़ रहे हैं.

इस बार एस्ट्रोनॉट्स अपने साथ सिर्फ हाई-टेक स्पेस इक्विपमेंट ही नहीं, बल्कि iPhones भी लेकर गए हैं. पहले के मिशन में जहां सिर्फ खास कैमरे इस्तेमाल होते थे, वहीं अब iPhones का इस्तेमाल इसे थोड़ा अलग और मॉडर्न बना रहा है.

iPhones को साथ क्यों रखा गया है?

दरअसल, वजह है इसकी आसान इस्तेमाल करने की क्षमता और बेहतर डॉक्यूमेंटेशन. अब एस्ट्रोनॉट्स iPhone जैसे स्मार्टफोन से हाई-क्वालिटी फोटो और वीडियो कैप्चर कर सकते हैं, मिशन के दौरान अपने खास पलों को रिकॉर्ड कर सकते हैं और स्पेसक्राफ्ट के अंदर की एक्टिविटीज को आसानी से डॉक्यूमेंट कर सकते हैं.

एक और दिलचस्प बात ये है कि एस्ट्रोनॉट्स पहले से ही iPhone जैसे डिवाइस इस्तेमाल करने के आदी होते हैं. इसलिए उन्हें इसे ऑपरेट करने में कोई दिक्कत नहीं होती. वो आसानी से अपने मिशन के दौरान पर्सनल और बिहाइंड-द-सीन मोमेंट्स कैप्चर कर सकते हैं.

स्पेस में iPhone 17 Pro Max, लेकिन कुछ नियमों के साथ

स्पेस में iPhone 17 Pro Max इस्तेमाल तो हो रहा है, लेकिन वैसे नहीं जैसे हम धरती पर करते हैं. मिशन के दौरान इन फोन्स को लगातार Airplane Mode में रखा जाता है. इसकी वजह भी काफी दिलचस्प है. स्मार्टफोन्स से निकलने वाले सिग्नल्स स्पेसक्राफ्ट के सिस्टम में दखल दे सकते हैं. इसलिए कनेक्टिविटी बंद रखकर इन्हें सिर्फ एक कैमरा और रिकॉर्डिंग डिवाइस की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

दिखने में ये बिल्कुल नॉर्मल iPhone जैसा ही लगता है, लेकिन इसका इस्तेमाल पूरी तरह कंट्रोल में होता है. अभी तक NASA ने ये साफ नहीं किया है कि ये फोन्स खास तौर पर मॉडिफाइड हैं या फिर मार्केट में मिलने वाले नॉर्मल वर्जन ही हैं. लेकिन एक बात जरूर साफ है कि स्पेस मिशन्स में अब छोटे, पावरफुल और आम कंज्यूमर टेक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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