Google Maps भी बताएगा कितना है आपके शहर का AQI, बस 3 स्टेप्स में तुरंत करें चेक

Google Maps: उत्तर भारत में हवा की क्वालिटी लगातार खराब हो रही है, जिससे रोजमर्रा की यात्रा करना काफी मुश्किल हो गया है. सरकार हवा की सफाई के लिए काम कर रही है, लेकिन इसी बीच Google Maps का रियल‑टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) फीचर यूजर्स को प्रदूषण के लेवल के बारे में तुरंत जानकारी देता है. आइए जानते हैं कैसे.

Google Maps: आए दिन आप जरूर यह खबर सुन या देख रहे होंगे कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में हवा की क्वालिटी दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. ऐसे में रोज घर से घर निकल कर काम पर जाने वाले लोगों के लिए सांस लेना और गाड़ी चलाना दोनों ही मुश्किल हो गया है. सरकार भले ही AQI को कंट्रोल में रखने की कोशिश कर रही हो, लेकिन वहीं Google Maps आपको आपके आसपास के इलाकों का रियल-टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक करने में मदद करता है.

अगर आप रोजाना कहीं आते-जाते हैं, तो घर से निकलने से पहले Google Maps पर एक बार AQI देख लेना बहुत जरूरी है. यह ऐप आपको ज्यादा प्रदूषित इलाकों के बारे में अलर्ट करता है, ताकि आप पहले से सावधानी बरत सकें. आइए आपको बताते हैं आप Google Maps पर आसानी से AQI कैसे चेक कर सकते हैं.

Google Maps पर AQI कैसे चेक करें?

पहला तरीका

  • स्टेप 1: अपने Android फोन या iPhone में सबसे पहले Google Maps ऐप खोलें.
  • स्टेप 2: ऊपर प्रोफाइल फोटो के नीचे आपको Layers का ऑप्शन दिखेगा, उस पर टैप करें.
  • स्टेप 3: अब स्क्रीन पर कई सारे ऑप्शन खुल जाएंगे, उनमें से Air Quality वाला ऑप्शन को सेलेक्ट कर लें.

दूसरा तरीका

  • स्टेप 1: Google Maps की होम स्क्रीन पर जाएं और नीचे बाईं और ‘Explore’ पर टैप करें.
  • स्टेप 2: यहां आपको मौसम और AQI दिखाने वाला एक आइकन नजर आएगा. उस पर क्लिक करें.
  • स्टेप 3: अब आपकी लोकेशन का टेम्परेचर दिखेगा और उसके नीचे ‘Air Quality’ का ऑप्शन मिलेगा.
  • स्टेप 4: Air Quality पर टैप करते ही आपके आसपास की हवा की क्वालिटी स्क्रीन पर दिखाई देने लगेगी.

Google Maps में लाल और हरे रंग का क्या मतलब होता है?

Google Maps में 0 से 500 तक का एक स्केल दिखता है, जिसमें हरा, पीला, नारंगी और लाल जैसे रंग नजर आते हैं. ये रंग आपके इलाके की हवा की क्वालिटी बताते हैं. अगर यह स्केल 0 से 100 के बीच है, तो हवा को काफी हद तक सेफ माना जाता है और स्क्रीन पर हरा रंग दिखता है. लेकिन अगर यह स्केल 500 के करीब पहुंच जाए और स्क्रीन पूरी तरह लाल दिखे, तो समझिए हवा बहुत खराब है और बाहर निकलने से पहले सावधानी बरतना जरूरी होता है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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