Google का मतलब क्या है? क्या आपको पता है इसका फुल फॉर्म, जानें कहां से आया ये शब्द

Google के बारे में आज कौन नहीं जानता, हम रोज इसका नाम लेते, सुनते और इस्तेमाल करते हैं. पूरी दुनिया की जानकारी आपको यहां मिल जाती है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि गूगल का असली मतलब क्या है? और इसका फुल फॉर्म क्या होता है. आखिर ये शब्द आया कहां से? आइए आपको बताते हैं.

Google: आज जब भी हमें कुछ जानना होता है या किसी सवाल का जवाब ढूंढ़ना होता है तो सबसे पहले हमारे मन में आता है- ‘गूगल कर लेते हैं.’ इसके आने से जिंदगी काफी ज्यादा आसान बन गई है. आज 27 साल गुजरने के बाद, गूगल सिर्फ एक सर्च इंजन तक सीमित नहीं है. अब ये Gmail, YouTube, Google Maps, Android और Google AI जैसी ढेरों सर्विसेज का एक बड़ा नेटवर्क बन चुका है, और इन सारी चीजों से अब हम काफी ज्यादा जुड़ भी चुके हैं.

गूगल के आने के इतने साल बाद भी, आज भी कई लोगों का इसका मतलब और फुल फॉर्म नहीं पता होता है. क्या आप जानते हैं? अगर नहीं तो आइए आज आपको बताते हैं. 

Google का मतलब क्या है?

गूगल को बनाते समय लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन ने इसका नाम BackRub था. बाद में इसे बदल कर Google कर दिया गया था. लेकिन इसके पीछे भी एक कहानी है. असल में ये नाम “Googol” शब्द से लिया गया है. जिसका मतलब होता है वह नंबर जिसमें 1 के बाद 100 शून्य (Zero) लगे हों. न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 1920 में अमेरिकी गणितज्ञ एडवर्ड कस्नर के 9 साल के भतीजे मिल्टन सिरोटा ने किया था. बच्चे ने सोचा कि इतना बड़ा नंबर एक मजेदार नाम का हकदार है.

जब लैरी पेज और उनकी टीम अपनी सर्च इंजन का नाम सोच रहे थे, तो किसी ने “Googol” सुझाया. लैरी ने डोमेन चेक किया, लेकिन टाइपिंग में गलती से “Google” लिख दिया गया. उन्हें ये नाम अच्छा लगा और फिर यही नाम फाइनल हो गया. इसका मतलब ये हुआ की दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजनों में से एक का नाम सिर्फ एक टाइपो (गलती से हुई स्पेलिंग) की वजह से पड़ गया.

Google का फुल फॉर्म क्या है?

गूगल का नाम तो आप रोज लेते, सुनते और इस्तेमाल करते ही होंगे, लेकिन इसका पूरा नाम शायद ही किसी को पता हो. अगर आप नहीं जानते तो बता दें, गूगल का फुल फॉर्म है- Global Organization of Oriented Group Language of Earth. इसी को छोटा करके हम सब Google कहते हैं.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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