पुराने स्मार्टफोन अक्सर हमारे घरों में किसी दराज या अलमारी में सालों तक पड़े रहते हैं, या फिर कुछ लोग उन्हें नए फोन लेने के बाद रीसायकल कर देते हैं. लेकिन अब Google ने इन पुराने फोन्स के लिए एक बिल्कुल नया और दिलचस्प आइडिया पेश किया है. टेक कंपनी के एक नए रिसर्च के मुताबिक, पुराने स्मार्टफोन सिर्फ बेकार नहीं हैं. उन्हें छोटे-छोटे कंप्यूटिंग क्लस्टर में बदलकर दोबारा यूज किया जा सकता है. यानी ये फोन मिलकर क्लाउड एप्लिकेशन, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स को पावर दे सकते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम होगा और कंप्यूटिंग का एनवायरनमेंट पर पड़ने वाला असर भी काफी हद तक कम होगा.
फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग को लेकर Google की नई पहल
यह रिसर्च University of California San Diego के साथ मिलकर की गई है, जिसमें एक दिलचस्प कॉन्सेप्ट पर काम हो रहा है जिसे ‘फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग’ कहा जाता है. इस आइडिया का मकसद पुराने स्मार्टफोन्स को फेंकने के बजाय उनका दोबारा यूज करना है. यानी जो फोन अब यूज नहीं हो रहे, उनके अंदर के पावरफुल हार्डवेयर को एक नया जीवन देना.
इस प्रोसेस में सबसे पहले फोन से डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा और बाहरी पार्ट्स हटा दिए जाते हैं. इसके बाद जो हिस्सा बचता है, वो मदरबोर्ड होता है. इसमें ही प्रोसेसर, मेमोरी और स्टोरेज जैसे अहम कंपोनेंट्स मौजूद होते हैं. इन बचे हुए मदरबोर्ड्स को आपस में जोड़कर एक नेटवर्क बनाया जाता है और उन्हें Linux बेस्ड सिस्टम पर चलाया जाता है. खास बात यह है कि इन सभी जुड़े हुए डिवाइसेज को Kubernetes की मदद से मैनेज किया जा सकता है. यह आमतौर पर क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को कंट्रोल और ऑर्गनाइज करने के लिए यूज होता है.
पुराने स्मार्टफोन कैसे बन सकते हैं डेटा सेंटर का हिस्सा?
Google की एक रिसर्च के मुताबिक, सिर्फ 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन मिलकर कुछ खास तरह के कामों में एक छोटे सर्वर जैसी परफॉर्मेंस दे सकते हैं. यानी जो फोन हम यूज के बाद बेकार समझकर रख देते हैं, वही मिलकर एक मिनी डेटा सेंटर की तरह काम कर सकते हैं. रिसर्चर्स का कहना है कि अगर हजारों पुराने मोबाइल्स को आपस में जोड़ दिया जाए, तो एक ऐसा पावरफुल कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार किया जा सकता है जो क्लाउड सर्विसेज और रिसर्च जैसे भारी काम भी संभाल सके.
इसी दिशा में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के रिसर्चर्स एक बड़ा प्रोजेक्ट बना रहे हैं, जिसमें करीब 2000 पुराने Pixel स्मार्टफोन्स का क्लस्टर तैयार करने की प्लानिंग है. इस सिस्टम का यूज सिस्टम प्रोग्रामिंग और पैरलल कंप्यूटिंग जैसे कोर्स पढ़ाने में भी किया जाएगा. इसके साथ ही, यह प्रोजेक्ट साइंटिस्ट्स को यह समझने में भी मदद करेगा कि जब नॉर्मल कंज्यूमर डिवाइसेज को डेटा सेंटर जैसे माहौल में यूज किया जाता है, तो वे कैसे परफॉर्म करते हैं.
क्या फोन क्लस्टर सर्वर AI मॉडल चला पाएंगे?
Google यह नहीं कह रहा है कि अब बड़े-बड़े AI मॉडल जैसे Gemini को ट्रेन करने के लिए यूज होने वाले पावरफुल GPU क्लस्टर्स की जगह फोन वाले क्लस्टर्स ले लेंगे. ऐसा बिल्कुल नहीं है. असल में इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ छोटे और मीडियम लेवल के क्लाउड कामों को संभालना है. मतलब वो भारी-भरकम AI ट्रेनिंग नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जरूरी काम जैसे यूनिवर्सिटी का रिसर्च वर्क, एजुकेशनल टास्क, वेब सर्विसेज, ऑनलाइन ग्रेडिंग सिस्टम, क्लाउड पर चलने वाले डेवलपमेंट टूल्स और Jupyter Notebook जैसी चीजें.
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