आज के समय में सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुका है. पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, हर काम के लिए बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताना और गलत कंटेंट देखना बच्चों की मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है. इसी चिंता को देखते हुए फ्रांस ने बड़ा फैसला लिया है. फ्रांस की संसद ने एक ऐसे कानून को मंजूरी दी है, जिसके तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे. सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल माहौल देना है.
क्यों लाना पड़ा यह कानून?
पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस में बच्चों और किशोरों के बीच सोशल मीडिया की लत तेजी से बढ़ी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार स्क्रीन देखने और सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने से बच्चों में तनाव, चिंता, नींद की समस्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसी वजह से सरकार ने फैसला किया है, कि कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित किया जाए, ताकि उनका बचपन ज्यादा सुरक्षित और स्वस्थ रह सके.
नए कानून में क्या होगा?
- फ्रांस में लागू होने वाले इस कानून के बाद कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.
- सितंबर 2026 से 15 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे.
- इस उम्र के बच्चों के पहले से बने अकाउंट भी जनवरी 2027 तक बंद किए जा सकते हैं.
- सोशल मीडिया कंपनियों को हर नए यूजर की उम्र की जांच करना जरूरी होगा. बिना उम्र वेरीफाई किए नया अकाउंट नहीं बनाया जा सकेगा.
सरकार के सामने क्या चुनौती है?
कानून बनाना आसान है, लेकिन उसे पूरी तरह लागू करना बड़ी चुनौती होगी. सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी यूजर की सही उम्र कैसे पता चले. इसके लिए फ्रांस सरकार डिजिटल पहचान और उम्र सत्यापन (Age Verification) की नई तकनीक पर काम कर रही है.
क्या सिर्फ फ्रांस ही ऐसा कर रहा है?
सिर्फ फ्रांस ही नहीं दुनिया के कई देश बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाने की तैयारी कर रहे हैं. ब्रिटेन, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए कानूनों पर चर्चा चल रही है.
क्या बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बंद होगा?
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट या नई तकनीक से दूर करना नहीं है. मकसद सिर्फ इतना है कि कम उम्र के बच्चे ऐसे कंटेंट और ऑनलाइन खतरों से बच सकें, जो उनकी मानसिक सेहत और विकास पर बुरा असर डाल सकते हैं.
बच्चों की सुरक्षा को मिलेगी प्रायोरिटी
डिजिटल दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं. ऐसे में फ्रांस का यह फैसला दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है. आने वाले समय में अगर यह कानून सफल रहता है, तो कई अन्य देश भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठा सकते हैं.
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