Dr Rahul Chandola: उम्र के बढ़ने के साथ बीमारी भी दस्तक देने लगती है. बुजुर्गों के साथ तो ये समस्या कुछ ज़्यादा ही रहती है. डॉक्टर की मानें तो 60 साल के बाद ज्यादा केयर की जरूरत होती है. आंकड़ों के मुताबिक भारत में फिलहाल 60 साल से ज्यादा की उम्र वालों की तादाद 153 मिलियन है. जो 2050 में 347 मिलियन और 2036 तक 230 मिलियन होने की उम्मीद है. बीपी, सुगर, भूलने की बीमारी, गिरने से होने वाली दिक्कत, डिप्रेशन, हड्डियों से जुड़ी समस्या ज्यादा गहराती है.
बुजुर्गों के डॉक्टर ( जेरियाट्रिशियन ) भी मानते हैं कि AI और टेक्नोलॉजी के इस दौर ने कई मुश्किलों को आसान किया. हालांकि तकनीक डॉक्टर को दरकिनार नहीं कर सकती, पर सहारा जरूरी बन सकती है. जिससे बुजुर्गों की जिंदगी भी आसान हो और परेशानी भी कम से कम हो. ऐसी ही एक तकनीक है iLIVE Connect. बीपी, सुगर से लेकर शरीर के तमाम वाइटल पैरामीटर्स की पल पल की मॉनिटरिंग रखने वाला AI बेस्ड उपकरण.
iLive Connect ( आईलिव कनेक्ट) के फाउंडर और कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉक्टर राहुल चंदोला बताते हैं कि घर परिवार से दूर रहने वाले बच्चों के जेहन में हमेशा ये बात रहती कि बुजुर्ग माता पिता कैसे होंगे? कहीं तबीयत तो नहीं खराब सब ठीक ठाक तो है? इसको लेकर iLive connect का एक खास प्लान iLive connect Elder Care है जिसकी मदद से न केवल हर पल बुजुर्गों के हेल्थ की मॉनिटरिंग की जाती है बल्कि हर दिन एक डॉक्टर बुजुर्ग से बात भी करता है. रिस्ट वॉच और पैच के तौर पर मौजूद इस डिवाइस के ज़रिए दूर कमांड सेंटर में बैठे डॉक्टर 24×7 बुजुर्ग के हेल्थ के वाइटल पैरामीटर्स की मॉनिटरिंग कर रहे होते हैं.
दिल्ली और एनसीआर में कई जगह तो फ्लैट भी ऐसे तैयार हो रहे हैं जो बुजुर्ग फ्रेंडली हों . वहीं कुछ RWA और सोसाइटीज में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए खास तौर पर इस तरह के व्हाट्स ऐप ग्रुप बनाये जा रहे हैं जहां सुबह सुबह उनकी खैरियत की खोज खबर ली जाए. डॉक्टर चंदोला ने कहा अब iLive Connect Elder Care डिवाइस और डॉक्टरों की टीम सिर्फ उनके अपने का हालचाल नहीं लेगी, बल्कि सुनिश्चित करेगी कि हर पल डॉक्टर उनके पास है. रोजाना की रिपोर्ट फैमिली मेंबर भी देख सकते हैं.
