आजकल कारों में डैशकैम लगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. यह छोटा सा कैमरा आपकी कार की विंडस्क्रीन पर फिट होता है और ड्राइविंग के दौरान सामने का पूरा वीडियो रिकॉर्ड करता है. एक्सीडेंट की स्थिति में यह वीडियो सबूत बनकर सामने आता है और यह तय करने में मदद करता है कि गलती किसकी थी. यही वजह है कि इसे ‘सबूत वाला कैमरा’ कहा जा रहा है.
एक्सीडेंट में बचाव का हथियार
डैशकैम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपको झूठे आरोपों से बचाता है. कई बार सड़क हादसों में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन डैशकैम फुटेज से साफ हो जाता है कि किसने ट्रैफिक नियम तोड़े. बीमा क्लेम और कानूनी मामलों में भी यह वीडियो अहम सबूत साबित होता है.
मार्केट में मौजूद विकल्प
ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में कई ब्रांड्स के डैशकैम उपलब्ध हैं. बजट सेगमेंट में Crossbeats Road Eye Neo (₹1,999), CP Plus Dashcam (₹1,999), BOAT Hive Dashcam E1 (₹2,789) और Qubo Dashcam Pro X (₹2,790) जैसे मॉडल्स मौजूद हैं. इनमें नाइट विजन, फुल एचडी रिकॉर्डिंग और वाइड फील्ड व्यू जैसी सुविधाएं मिलती हैं.
तकनीकी फीचर्स और स्टोरेज
डैशकैम में माइक्रोएसडी कार्ड लगाया जाता है, जिसमें वीडियो स्टोर होता है. इसलिए यह जरूरी है कि कैमरा ज्यादा स्टोरेज सपोर्ट करे ताकि लंबे समय तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहे. कुछ मॉडल्स में नाइट विजन और हाई-रेजॉल्यूशन कैमरा भी मिलता है, जिससे रात में भी साफ फुटेज रिकॉर्ड किया जा सकता है.
क्यों बन रहा है ट्रेंड
भारत में सड़क हादसों की संख्या काफी ज्यादा है और ऐसे में डैशकैम लोगों के लिए सुरक्षा कवच बन रहा है. यह न सिर्फ ड्राइवर को जिम्मेदारी से गाड़ी चलाने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि कानूनी विवादों में भी मददगार साबित होता है. कम कीमत में उपलब्ध होने के कारण अब आम कार मालिक भी इसे खरीदने लगे हैं.
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