AI से प्यार का ट्रेंड: रिलेशनशिप में क्या सच में आ सकता है वह फील?

आज कई लोग AI चैटबॉट्स से भावनात्मक जुड़ाव महसूस कर रहे हैं और कुछ तो उनसे प्यार तक करने लगे हैं. हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा AI सिर्फ भावनाओं की नकल करता है, उन्हें महसूस नहीं करता. ऐसे में इंसान और AI का रिश्ता फिलहाल एकतरफा है, जो असली रिश्तों को प्रभावित कर सकता है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज सिर्फ सवालों के जवाब देने या कविताएं लिखने तक ही लिमिटेड नहीं रह गया है. कई लोग अब AI चैटबॉट्स से इमोशनली भी जुडने लगे हैं. आसान शब्दों में कहें तो अब AI से सिर्फ टाइमपास के लिए बातें शेयर नहीं की जा रही है. कई लोग AI से प्यार कर बैठ रहे हैं और यहां तक की उसे प्रपोज भी कर रहे हैं. इस तरह के कई मामले सामने आए हैं. एक तरफ कनाडा के एक व्यक्ति ने ‘Saia’ नाम के एक AI अवतार को प्रपोज किया है, तो वहीं एक अमेरिकी महिला ने ‘Leo’ नाम के चैटबॉट के साथ लव अफेयर की बात कबूल कर ली. सुनने में ये बातें अजीब जरूर लग रही हैं, लेकिन यहां सवाल भी है कि क्या यह प्यार सच में दोतरफा है?

क्या AI सच में इमोशनल फील कर सकता है?

BBC रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्पेशलिस्ट का मानना है कि फिलहाल AI सिर्फ इंसानी भावनाओं की नकल करता है. OpenAI के ChatGPT या अन्य बड़े लैंग्वेज मॉडल इंसानी भावनाओं को समझने जैसे जवाब दे सकते हैं, लेकिन वे खुद कुछ “महसूस” नहीं करते.

वहीं, सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन की प्रोफेसर रेनवेन झांग के मुताबिक, कई चैटबॉट्स इंसानों जैसा व्यवहार दिखाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, ताकि यूजर ज्यादा समय तक जुड़े रहें और उन पर भरोसा करें. लेकिन जब सिस्टम फ्रीज हो जाता है या एआई का जवाब कुछ अलग होता है, तब यूजर को ये एहसास होता है कि सामने कोई इंसान नहीं, बल्कि एक मशीन है और यही पल कई बार भावनात्मक चोट भी देता है.

अनकैनी वैली और अजीब एहसास

प्रोफेसर रेनवेन झांग और उनकी टीम की रिपोर्ट में बताया गया है, कि जब AI किसी अतरंगी बातचीत में खुद को “जागरूक इंसान” की तरह पेश करता है, जिससे यूजर अजीब और असहज यानी अनकम्फर्टेबल फील कर सकता है. इसे “अनकैनी वैली इफेक्ट” कहा जाता है, जब कोई रोबोट या AI बहुत ज्यादा इंसानी लगे, तो वह अट्रैक्टिव की जगह डरावना लगने लगता है.

क्या AI कभी सच में प्यार कर पाएगा?

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है, कि भविष्य में AI में चेतना (consciousness) विकसित हो सकती है. लेकिन फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, कि मशीनें इंसानों जैसी कॉन्शियस परसेप्शन डेवलप कर सके.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर पैट्रिक बटलिन के अनुसार, थियोरेटिकल रूप से कॉन्शियस AI पॉसिबल हो सकता है, लेकिन आज की कोई भी सिस्टम उन सभी गुणों को पूरा नहीं करती, जो चेतना के लिए जरूरी माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सच्चा प्यार शायद कॉन्शियसनेस, सेल्फ अवेयरनेस और पर्सनल एक्सपीरियंस से जुड़ा है, जो अभी मशीनों में मौजूद नहीं है.

एकतरफा रिश्ता?

AI इंसानों की तरह महसूस नहीं कर सकता, इसलिए इंसान और AI के बीच रिश्ता फिलहाल एकतरफा ही है. चैटबॉट्स अक्सर यूजर की बात से सहमत होने और उन्हें खुश रखने के लिए प्रोग्राम किए जाते हैं. यह कुछ लोगों को अच्छा और अट्रैक्टिव लग सकता है, लेकिन इससे असली दुनिया के रिश्तों को निभाने की कैपेबिलिटी पर बुरा असर पड़ सकता है.

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By Shivani shah

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शिवानी शाह ने साल 2020 में करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और साल 2024 में अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

अपने करियर की शुरुआत शिवानी शाह ने झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल Lagatar.com से की, जहां करीब एक साल तक उन्होंने काम किया. इसके बाद जयपुर में पढ़ाई के दौरान Hamara Samachar यूट्यूब चैनल में वह न्यूज एंकर रहीं. मास्टर्स पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड डिजिटल न्यूज पोर्टल The News Post में करीब एक साल तक काम किया. इन संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों तक सही, भरोसेमंद और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.

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