एयरटेल की नयी ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सर्विस इन दिनों टेलीकॉम इंडस्ट्री में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है. कंपनी का दावा है कि इस फीचर की मदद से भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी पोस्टपेड यूजर्स को ज्यादा स्थिर और बेहतर इंटरनेट स्पीड मिलेगी. हालांकि, इस सर्विस को लेकर ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ यानी समान इंटरनेट एक्सेस पर सवाल उठने लगे थे. अब एयरटेल ने सरकार के सामने अपना पक्ष रखते हुए साफ किया है कि यह सुविधा किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करती और इससे दूसरे ग्राहकों की इंटरनेट क्वालिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
क्या है एयरटेल की ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सर्विस?
एयरटेल ने 19 मई को अपनी नई ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सेवा शुरू की थी. इस फीचर का मकसद उन यूजर्स को बेहतर नेटवर्क अनुभव देना है, जो पोस्टपेड कनेक्शन इस्तेमाल करते हैं. खासतौर पर स्टेडियम, मॉल, रेलवे स्टेशन या बड़े इवेंट जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर नेटवर्क स्लो होने की समस्या आम होती है. एयरटेल का कहना है कि नई तकनीक के जरिए पोस्टपेड यूजर्स को ऐसी स्थिति में ज्यादा स्टेबल स्पीड और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी.
सरकार के सामने एयरटेल ने क्या सफाई दी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समिति ने इस सर्विस को लेकर एयरटेल से स्पष्टीकरण मांगा था. इसके जवाब में कंपनी ने कहा कि यह सेवा पूरी तरह “कंटेंट-न्यूट्रल” है. यानी किसी ऐप, वेबसाइट या कंटेंट को अलग से प्राथमिकता नहीं दी जा रही. कंपनी ने यह भी कहा कि इसमें ना किसी वेबसाइट की स्पीड कम की जाती है और ना ही किसी ऐप को फ्री डेटा या विशेष लाभ दिया जाता है.
एयरटेल ने अपने जवाब में यह भी बताया कि यह सुविधा 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक पर आधारित है. इस तकनीक में नेटवर्क को अलग-अलग वर्चुअल हिस्सों में बांटकर बेहतर नेटवर्क मैनेजमेंट किया जाता है. कंपनी के मुताबिक, यही टेक्नोलॉजी भविष्य में 6जी नेटवर्क की नींव मजबूत करने में मदद करेगी.
क्या प्रीपेड यूजर्स पर पड़ेगा असर?
कई लोगों के मन में सवाल है कि अगर पोस्टपेड यूजर्स को ‘प्रायोरिटी’ मिलेगी, तो क्या प्रीपेड ग्राहकों की इंटरनेट स्पीड कम हो जाएगी? एयरटेल ने इस आशंका को खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि उसके 5जी नेटवर्क की मौजूदा क्षमता का केवल 38 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल हो रहा है. वहीं पोस्टपेड ट्रैफिक अभी कुल नेटवर्क उपयोग का लगभग 4 प्रतिशत है, जो इस फीचर के बाद भी करीब 6 प्रतिशत तक ही पहुंचेगा. यानी नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बहुत ज्यादा नहीं होगा.
5जी और 6जी की दिशा में बड़ा कदम?
टेलीकॉम एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नेटवर्क स्लाइसिंग भविष्य की हाई-स्पीड मोबाइल टेक्नोलॉजी का अहम हिस्सा बनने वाली है. आने वाले समय में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से नेटवर्क को कस्टमाइज किया जा सकेगा. उदाहरण के तौर पर, गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, स्मार्ट कार या हेल्थकेयर सेवाओं के लिए अलग नेटवर्क स्लाइस इस्तेमाल हो सकते हैं. ऐसे में एयरटेल की यह पहल भारत में 6जी तकनीक की तैयारी के रूप में भी देखी जा रही है.
यूजर्स के लिए क्या मायने रखती है ये सर्विस?
अगर एयरटेल का दावा सही साबित होता है, तो पोस्टपेड ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में बेहतर इंटरनेट अनुभव मिल सकता है. खासकर वीडियो कॉल, लाइव स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन गेमिंग जैसे काम ज्यादा स्मूद हो सकते हैं. हालांकि, आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दूसरी टेलीकॉम कंपनियां भी इस तरह की सेवाएं शुरू करती हैं या नहीं.
यह भी पढ़ें: 548 रुपये में 84 दिन चलेगा रिचार्ज, कॉलिंग के साथ डेटा भी
