Air India Plane Crash: मिल गया DVR, जानिए क्या है यह डिवाइस जो बताएगी हादसे का सच

DVR: एयर इंडिया विमान हादसे में क्षतिग्रस्त हुए मलबे से ATS अधिकारियों ने DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) बरामद कर लिया है. यह डिवाइस दुर्घटना की जांच की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगी. आइए जानते हैं कि DVR क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

गुरुवार यानी 12 जून को हुए एयर इंडिया विमान हादसे में क्षतिग्रस्त हुए मलबे से डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) बरामद कर लिया गया है. माना जा रहा है कि यह रिकवरी जांच एजेंसियों को दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में मदद करेगी. अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद लंदन जा रहे एयर इंडिया के बोइंग ड्रीमलाइनर विमान का मलबा जिला अस्पताल के पास मिला है.

जांच में जुटी ATS टीम को विमान के भीतर से DVR मिला, जिससे जांच की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है. इस घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय टीम का गठन किया गया है. इससे पहले, विमान का ब्लैक बॉक्स भी बरामद किया जा चुका है. आज हम आपको इसी DVR के बारे में बताने जा रहे आखिर यह होता क्या है और ये काम कैसे करता है.

क्या होता है DVR?

DVR यानी डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर एक सेफ्टी डिवाइस है जिसे विमानों में लगाया जाता है. यह डिवाइस फ्लाइट में मौजूद सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग करता है. DVR विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों को झेलने के लिए तैयार किया जाता है और यह लंबे समय तक रिकॉर्डिंग करने की क्षमता रखता है. उड़ान की समीक्षा के बाद इसमें रिकॉर्ड डेटा को निकाला जा सकता है.

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DVR काम कैसे करता है?

डीवीआर एक स्टोरेज डिवाइस के रूप में काम करता है, जिसमें लोकल डाटा को सुरक्षित रखने के लिए हार्ड ड्राइव लगी होती है. यह डिवाइस कॉकपिट, यात्री केबिन, प्रवेश और निकास द्वारों तथा इमरजेंसी एग्जिट पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग को स्टोर करता है.

यह डिवाइस CCTV कैमरों से प्राप्त एनालॉग वीडियो सिग्नलों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रूप से एन्कोड करता है. सुरक्षा संबंधी उपयोग में आने वाले अधिकांश डीवीआर कैमरा रिकॉर्डर सिग्नल एन्कोडिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. जरूरत पड़ने पर इन रिकॉर्डेड फुटेज को डिकोड किया जा सकता है. विमान दुर्घटना की स्थिति में, डीवीआर में दर्ज वीडियो फुटेज का विश्लेषण कर हादसे के संभावित कारणों का पता लगाया जा सकता है.

DVR और Black Box में क्या अंतर है?

DVR और ब्लैक बॉक्स में काफी अंतर होता है. ब्लैक बॉक्स आमतौर पर विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) से मिलकर बना होता है. जहां DVR विमान से जुड़ी वीडियो फुटेज या अन्य डेटा को स्टोर कर सकता है, वहीं ब्लैक बॉक्स विशेष रूप से उड़ान के महत्वपूर्ण डेटा और कॉकपिट की ऑडियो रिकॉर्डिंग को कैप्चर करता है, जो किसी दुर्घटना से पहले की परिस्थितियों की जांच के लिए बेहद जरूरी होते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

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अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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