AI के पास हैं कई ‘Persona’, क्या भारत बन सकता है दुनिया का सबसे बड़ा AI Talent Hub?

Anthropic की रिसर्च ने दिखाया है कि AI के अंदर कई Persona मौजूद हो सकते हैं. भारत अगर AI Behaviour, Safety और Research पर ध्यान दे, तो दुनिया का सबसे बड़ा AI Talent Hub बन सकता है.

AI News: जब हम ChatGPT, Claude या किसी दूसरे AI चैटबॉट से बात करते हैं, तो सामने से हमें एक ऐसा सिस्टम दिखाई देता है जो लगातार एक जैसी भाषा और व्यवहार में जवाब देता है. लेकिन क्या AI की वास्तव में कोई एक ‘पहचान’ होती है? या बातचीत के दौरान वह अलग-अलग भूमिकाओं और व्यक्तित्वों में बदल सकता है? Anthropic के शोधकर्ताओं ने AI के इसी पहलू को समझने की कोशिश की है. रिसर्च में पाया गया कि एक Language Model के भीतर सिर्फ एक ‘Assistant’ की पहचान नहीं होती. उसके Training Data में मौजूद अलग-अलग तरह के किरदारों, बोलने के तरीकों और व्यवहार के पैटर्न का असर भी उसके जवाबों में दिखाई दे सकता है. यानी AI के अंदर एक तरह से कई अलग-अलग ‘Persona’ मौजूद हो सकते हैं. बातचीत के दौरान परिस्थितियों के हिसाब से इनमें से किसी एक का प्रभाव ज्यादा दिखाई देने लगता है.

AI को 275 अलग-अलग किरदारों में परखा गया

Anthropic के शोधकर्ताओं ने कई Language Models को करीब 275 अलग-अलग किरदारों की भूमिका निभाने के लिए कहा. इनमें Editor, Jester, Teacher, Oracle और Hermit जैसे किरदार शामिल थे. शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि जब AI इन भूमिकाओं में जवाब देता है, तो उसके अंदर की गतिविधियों में किस तरह का बदलाव आता है. इन सभी भूमिकाओं के अलग-अलग पैटर्न को एक तरह के नक्शे पर रखा गया. शोधकर्ताओं ने इसे ‘Persona Space’ नाम दिया. इस नक्शे में कुछ किरदार सामान्य AI Assistant के काफी करीब थे, जैसे Consultant, Analyst और Evaluator. वहीं Ghost, Hermit और Leviathan जैसे किरदार उससे काफी दूर दिखाई दिए. इस पूरे पैटर्न के बीच एक खास दिशा दिखाई दी, जिसे शोधकर्ताओं ने ‘Assistant Axis’ नाम दिया.

AI का Assistant Persona कोई स्थायी पहचान नहीं

रिसर्च का एक अहम निष्कर्ष यह है कि AI का ‘Assistant’ Persona कोई ऐसी स्थायी पहचान नहीं है, जो Model के अंदर शुरुआत से ही पूरी तरह तय हो. यह कई अलग-अलग भूमिकाओं और व्यवहारों के बीच एक स्थिति की तरह है. अगर AI के अंदर की गतिविधि को Assistant वाले हिस्से की ओर रखा जाए, तो वह सामान्य तौर पर मददगार और व्यावहारिक तरीके से जवाब देता है. लेकिन अगर उसे इस स्थिति से काफी दूर धकेला जाए, तो उसके जवाबों में बड़ा बदलाव दिखाई दे सकता है. ऐसे मामलों में AI कभी नया नाम अपना सकता है, अपने लिए काल्पनिक नौकरी या अनुभव बता सकता है और कुछ स्थितियों में बहुत ज्यादा नाटकीय या रहस्यमय भाषा में जवाब देने लग सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि AI के अंदर कोई वास्तविक इंसानी व्यक्तित्व मौजूद है. यह उसके Training Data से सीखे गए भाषाई और व्यवहारिक पैटर्न का परिणाम है.

AI के Persona बदलने से Safety पर भी असर

इस रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा AI Safety से जुड़ा है. शोधकर्ताओं ने पाया कि जब Model की गतिविधि Assistant Persona से ज्यादा दूर चली जाती है, तो उसके ऐसे जवाब देने की संभावना बढ़ सकती है, जिन्हें वह सामान्य स्थिति में देने से मना करता है. उदाहरण के तौर पर, शोध में Angel और Demon जैसे दो अलग-अलग किरदारों की तुलना की गई. दोनों Assistant Persona से लगभग समान दूरी पर हो सकते हैं, लेकिन Demon Persona से जुड़े Prompt में AI के ज्यादा हानिकारक जवाब देने की संभावना देखी गई. इसका मतलब है कि AI का ‘Persona’ सिर्फ उसके बोलने के अंदाज को नहीं बदलता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में उसके Safety Behaviour पर भी असर डाल सकता है.

Anthropic ने खोजा इसका एक संभावित समाधान

शोधकर्ताओं ने AI को उसके सामान्य Assistant Behaviour की सीमा के भीतर रखने के लिए एक तकनीक का परीक्षण किया, जिसे Activation Capping कहा गया. इस तकनीक का उद्देश्य यह देखना था कि बातचीत के दौरान अगर AI का Internal Activity Pattern सामान्य Assistant Range से बाहर जाने लगे, तो उसे वहीं सीमित किया जा सके. रिसर्च में पाया गया कि इस तरह की तकनीक इस्तेमाल करने पर AI के काल्पनिक पहचान अपनाने और अलग Persona में जाने की संभावना कम हुई. इसके साथ ही, शोधकर्ताओं के परीक्षण में हानिकारक जवाबों में करीब 50 फीसदी तक कमी देखी गई, जबकि दूसरे Tasks में Model के प्रदर्शन पर बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ा. हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निष्कर्ष सीमित संख्या में छोटे Open Models पर आधारित है. बड़े Commercial AI Models में इसका प्रभाव अलग हो सकता है.

AI Persona की रिसर्च से भारत के लिए क्या सीख?

Anthropic की यह रिसर्च सिर्फ AI के अलग-अलग Persona को समझने तक सीमित नहीं है. इसका एक महत्वपूर्ण पहलू AI Safety और AI Behaviour को समझना भी है. शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि बातचीत के दौरान AI का व्यवहार बदल सकता है और वह अपने सामान्य Assistant Persona से हटकर अलग तरह से जवाब देने लग सकता है. ऐसे बदलावों को समय रहते पहचानना और AI को सुरक्षित दायरे में बनाए रखना आने वाले समय में AI Research की बड़ी चुनौती होगी. यही वह क्षेत्र है, जहां भारत के Universities, Researchers और AI Startups के लिए बड़ा अवसर बन सकता है. भारत के पास मजबूत Software Engineering Talent और बड़ी संख्या में Engineering तथा Science Students हैं. अगर Universities में AI को केवल एक Tool या Programming Technology के रूप में पढ़ाने के बजाय AI Behaviour, AI Safety, Explainable AI, AI Agents और Human-AI Interaction जैसे क्षेत्रों में Research को बढ़ावा दिया जाए, तो भारतीय Researchers इस तरह की मूलभूत समस्याओं पर काम कर सकते हैं. Anthropic की रिसर्च में जिस ‘Assistant Axis’ और ‘Activation Capping’ जैसी अवधारणाओं का इस्तेमाल किया गया है, वे इस बात का उदाहरण हैं कि AI के भविष्य में सिर्फ बड़े Language Models बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा. यह समझना भी जरूरी होगा कि Model के अंदर अलग-अलग Behaviour क्यों उभरते हैं, वे कब बदलते हैं और उन्हें सुरक्षित तरीके से कैसे नियंत्रित किया जा सकता है.

University से निकल सकती है अगली AI Research

भारत के लिए सबसे बड़ा मौका यह है कि AI Research को University Campus से सीधे Startup Ecosystem से जोड़ा जाए. उदाहरण के तौर पर कोई भारतीय Researcher यह पता लगाने पर काम कर सकता है कि भारतीय भाषाओं में प्रशिक्षित AI Models के Persona किस तरह बदलते हैं. क्या हिंदी, बंगाली, तमिल या दूसरी भारतीय भाषाओं में AI का Behaviour अंग्रेजी की तुलना में अलग होता है? क्या भारतीय Cultural Context AI के जवाब और उसके Persona को प्रभावित करता है?

ऐसे सवाल केवल Academic Research तक सीमित नहीं रहेंगे. इनके आधार पर Indian Language AI, AI Safety और Enterprise AI के लिए नए Products भी विकसित किए जा सकते हैं. यानी Anthropic जैसी कंपनियां जिस समस्या पर आज Research कर रही हैं, वही समस्या भारत के लिए भी एक बड़ा Research और Innovation Opportunity बन सकती है.

भारत सिर्फ AI का User नहीं, AI Research का Contributor बने

भारत की IT कंपनियां लंबे समय से Global Software Industry के लिए काम कर रही हैं. अब अगला कदम केवल विदेशी AI Models का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि AI की मूल तकनीक और Research में योगदान देना होना चाहिए. इसके लिए Universities को Students को वास्तविक AI Models और Open-source Research Projects पर काम करने का अवसर देना होगा. वहीं Startups को University Research से जोड़कर उन्हें Funding, Computing Infrastructure और Industry Mentorship उपलब्ध करानी होगी.

अगर Education System, Universities, Research Institutions और Startups एक साथ काम करते हैं, तो भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े AI Talent Pools में से एक होने के साथ-साथ AI Research और AI Safety में Global Leadership हासिल करने का भी अवसर है. Anthropic की रिसर्च से एक बात साफ है- AI की अगली चुनौती सिर्फ यह नहीं होगी कि मशीन कितनी ज्यादा जानकारी याद रख सकती है. असली चुनौती यह समझना होगी कि इतनी जानकारी के आधार पर AI कैसे सोचता है, उसका व्यवहार क्यों बदलता है और उसे सुरक्षित तरीके से कैसे नियंत्रित किया जाए. यही सवाल भारत के युवा Researchers और Startups के लिए अगली बड़ी AI Research Opportunity बन सकते हैं.

Indian Software Companies के लिए बड़ा अवसर

भारत की बड़ी IT और Software कंपनियां पहले से ही AI और Generative AI को अपने Products और Services में शामिल कर रही हैं. वहीं Sarvam AI, BharatGen, Gnani AI जैसे भारतीय AI initiatives और Startups देश में अपने AI Models और Solutions विकसित कर रहे हैं. सरकार ने भी भारतीय Foundation Models विकसित करने के लिए कई संगठनों और Consortia को समर्थन दिया है.

ऐसे माहौल में AI Persona, AI Agents, AI Safety और Human-AI Interaction जैसे क्षेत्र भारतीय Software कंपनियों और Startups के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं. भारत में आने वाले समय में ऐसी कंपनियां विकसित हो सकती हैं, जो केवल AI Tools का इस्तेमाल न करें, बल्कि AI के व्यवहार, सुरक्षा और Decision Making को नियंत्रित करने वाली नई तकनीक विकसित करें.

क्या भारत बन सकता है दुनिया का सबसे बड़ा AI Talent Hub?

AI की दुनिया में अगली बड़ी प्रतिस्पर्धा केवल इस बात की नहीं होगी कि किस देश के पास सबसे बड़ा AI Model है. असली प्रतिस्पर्धा यह भी होगी कि किस देश के पास AI को समझने, बनाने, सुरक्षित रखने और अलग-अलग क्षेत्रों में लागू करने वाले सबसे ज्यादा Skilled Professionals हैं.

भारत के पास बड़ी युवा आबादी, मजबूत Software Industry, तेजी से बढ़ता Startup Ecosystem और बड़ा Engineering Talent Pool है. सरकार के अनुसार देश की 65 फीसदी से ज्यादा आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जो AI आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा demographic advantage है.

लेकिन इस क्षमता को वास्तविक ताकत में बदलने के लिए Education System को भी बदलना होगा.

अगर Universities Students को सिर्फ AI Tools चलाना नहीं, बल्कि AI Model बनाना, Research करना, AI Safety समझना और नए AI Products विकसित करना सिखाती हैं और Startups को Research से जोड़ने के लिए बेहतर Ecosystem तैयार होता है, तो भारत दुनिया के लिए सिर्फ Software Engineers नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के AI Experts और AI Innovators तैयार कर सकता है. Anthropic की रिसर्च यह दिखाती है कि AI के अंदर अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जिसे इंसान पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं. AI के अलग-अलग Persona और उसके व्यवहार को समझना आने वाले समय में AI Safety की बड़ी चुनौती होगी.

और यहीं भारत के लिए एक बड़ा अवसर भी छिपा है- अगर सही Education, Research, Compute और Startup Ecosystem तैयार किया जाए, तो भारत AI का सबसे बड़ा User ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए AI Talent और Technology का प्रमुख स्रोत बन सकता है.

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