MWC 2026: AI युग में जियो का ऐलान- टोकन्स से बनेगी नयी इकोनॉमी

मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में जियो प्लैटफॉर्म्स के सीईओ मैथ्यू ओमेन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं, बल्कि पूरी इकोनॉमी का रीसेट है. जियो अब खुद को नेटवर्क प्रोवाइडर नहीं, बल्कि ‘इंटेलिजेंस ग्रिड’ का निर्माता मानता है. कंपनी का लक्ष्य है सबसे कम लागत पर AI टोकन्स उपलब्ध कराना.

बार्सिलोना में आयोजित मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में जियो प्लैटफॉर्म्स लिमिटेड के ग्रुप सीईओ मैथ्यू ओमेन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ तकनीकी अपग्रेड नहीं, बल्कि पूरी इकोनॉमी का रीसेट है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया अब “मिनट्स और बाइट्स” से आगे बढ़कर “टोकन्स और इंटेलिजेंस” की नयी अर्थव्यवस्था में प्रवेश कर रही है.

यूजर्स पर असर

जियो ने भारत में वॉइस कॉलिंग को मुफ्त कर और डेटा की कीमतों को बेहद कम कर डिजिटल कनेक्टिविटी को आम जनता तक पहुंचाया. अब कंपनी का लक्ष्य है कि AI टोकन्स को सबसे कम लागत पर उपलब्ध कराया जाए. इसका मतलब है कि भविष्य में यूजर्स को किफायती दामों पर रियल-टाइम इंटेलिजेंट सेवाएं मिलेंगी- जैसे ऑटोमेटेड डिसीजन, मशीन-टू-मशीन इंटरैक्शन और AI आधारित पर्सनलाइज्ड अनुभव.

खास बातें

  • इंडस्ट्रियल एरा = प्रोडक्शन
  • इंटरनेट एरा = कनेक्टिविटी और क्लाउड
  • AIएरा = इकोनॉमी का रीसेट
  • टेलीकॉम करेंसी: मिनट्स → बाइट्स → टोकन्स

जियो का लक्ष्य: “टोकन-पर-वॉट” को सबसे कम लागत पर उपलब्ध कराना.

AI और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का मेल

ओमेन का मानना है कि AI और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का मेल एकीकृत आर्किटेक्चर बनाएगा, जो रियल टाइम में सोचने और निर्णय लेने में सक्षम होगा. यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं बल्कि आर्थिक और राष्ट्रीय नेतृत्व को भी प्रभावित करेगा. ऊर्जा, ट्रांसपोर्ट, फाइनेंस और सिक्योरिटी जैसे सेक्टर्स में इंटेलिजेंस एम्बेड करना भविष्य की मजबूरी होगी.

सिर्फ नेटवर्क प्रोवाइडर नहीं, बल्कि ‘इंटेलिजेंसग्रिड’ का निर्माता

जियो ने भारत में डिजिटल क्रांति की शुरुआत की थी और अब कंपनी खुद को सिर्फ नेटवर्क प्रोवाइडर नहीं, बल्कि ‘इंटेलिजेंस ग्रिड’ का निर्माता मान रही है. वैश्विक स्तर पर ट्रिलियन डॉलर का निवेश इस बात का संकेत है कि AI युग आने वाले वर्षों में हर सेक्टर की दिशा तय करेगा.

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Published by: Rajeev kumar

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