AC और स्टेबलाइजर का कॉम्बिनेशन जरूरी है या फिजूलखर्ची?

इन्वर्टर AC में वोल्टेज प्रोटेक्शन पहले से मौजूद होता है, लेकिन नॉन-इन्वर्टर AC में स्टेबलाइजर जरूरी है. बिजली के उतार-चढ़ाव वाले इलाकों में स्टेबलाइजर लगाने से AC की लाइफ और परफॉर्मेंस सुरक्षित रहती है.

गर्मी का मौसम आते ही एयर कंडीशनर की मांग बढ़ जाती है. लेकिन अक्सर खरीदारों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या AC के साथ स्टेबलाइजर लगाना जरूरी है. जवाब सीधा है- यह आपके इलाके की बिजली की स्थिति और AC के प्रकार पर निर्भर करता है.

स्टेबलाइजर का काम

स्टेबलाइजर बिजली के वोल्टेज को कंट्रोल करता है. अगर वोल्टेज अचानक कम या ज्यादा हो जाए तो यह AC को सुरक्षित रखता है. बिना स्टेबलाइजर के, बिजली में उतार-चढ़ाव से AC का कंप्रेसर और PCB खराब हो सकता है.

इन्वर्टर AC में स्थिति

आजकल आने वाले ज्यादातर इन्वर्टर AC में पहले से ही वोल्टेज प्रोटेक्शन सिस्टम होता है. ये AC आमतौर पर 160 से 280 वोल्ट तक आराम से काम कर लेते हैं. अगर आपके इलाके में बिजली स्थिर रहती है, तो अलग से स्टेबलाइजर लगाने की जरूरत नहीं होती.

कब जरूरी है स्टेबलाइजर

भारत के कई शहरों और पुराने इलाकों में वोल्टेज बार-बार गिरता या बढ़ता है. ऐसी स्थिति में इन्वर्टर AC का अंदरूनी प्रोटेक्शन हर बार काफी नहीं होता. लंबे समय तक उतार-चढ़ाव से AC की लाइफ कम हो सकती है. ऐसे इलाकों में स्टेबलाइजर लगाना जरूरी है.

नॉन-इन्वर्टर AC में जरूरी

पुराने या नॉन-इन्वर्टर AC में वोल्टेज प्रोटेक्शन नहीं होता. ये सीधे बिजली पर निर्भर करते हैं. इसलिए इनके साथ स्टेबलाइजर लगाना जरूरी है, वरना अचानक वोल्टेज फ्लक्चुएशन से AC खराब हो सकता है.

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By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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