सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधार कार्ड धारकों को मुफ्त एयर कंडीशनर (AC) देने की घोषणा की है. वीडियो के वायरल होते ही लाखों लोगों के बीच इस कथित योजना को लेकर चर्चा शुरू हो गई. हालांकि अब केंद्र सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी ने इस दावे की सच्चाई सामने ला दी है. सरकार ने साफ कहा है कि ऐसा कोई ऐलान नहीं किया गया है और वायरल वीडियो पूरी तरह भ्रामक है.
PIB फैक्ट चेक ने खोली वायरल वीडियो की पोल
सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने वायरल वीडियो की जांच के बाद बताया कि इसमें दिखाया गया दावा पूरी तरह गलत है. एजेंसी के अनुसार प्रधानमंत्री की ओर से आधार कार्ड धारकों को मुफ्त AC देने जैसी कोई योजना या घोषणा नहीं की गई है. लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसे वीडियो और संदेशों पर आंख बंद कर भरोसा न करें.
AI तकनीक से तैयार किया गया वीडियो
फैक्ट-चेक में यह भी सामने आया कि वायरल वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है. हाल के वर्षों में AI आधारित फर्जी वीडियो और ऑडियो क्लिप्स तेजी से बढ़े हैं, जिनका इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक तकनीक के कारण ऐसे कंटेंट की पहचान करना आम लोगों के लिए पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है.
क्यों तेजी से फैलती हैं ऐसी अफवाहें?
सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर आकर्षक ऑफर, मुफ्त योजनाओं और सरकारी लाभ से जुड़ी खबरें बहुत तेजी से वायरल होती हैं. कई बार लोग बिना सत्यापन किए इन्हें आगे साझा कर देते हैं. इसी वजह से गलत जानकारी कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है. मुफ्त गैस सिलेंडर, नोटबंदी, बैंकिंग नियमों और सरकारी योजनाओं से जुड़े फर्जी दावे पहले भी वायरल होते रहे हैं.
सरकारी योजनाओं की जानकारी कहां से लें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी सरकारी योजना की जानकारी केवल आधिकारिक पोर्टल और सरकारी स्रोतों से ही लेनी चाहिए. अगर किसी वायरल पोस्ट में बड़े लाभ या मुफ्त सुविधा का दावा किया गया हो, तो उसकी पुष्टि संबंधित मंत्रालय, सरकारी वेबसाइट या अधिकृत फैक्ट-चेक प्लैटफॉर्म से जरूर करनी चाहिए.
फर्जी खबरों से बचना क्यों जरूरी है?
गलत जानकारी सिर्फ भ्रम नहीं फैलाती बल्कि कई बार लोगों को आर्थिक और सामाजिक नुकसान भी पहुंचा सकती है. इसलिए किसी भी संदेश को आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है. सरकार ने भी लोगों से अपील की है कि वे वायरल कंटेंट के लालच में न आएं और केवल प्रमाणित सूचनाओं पर भरोसा करें.
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