सभी देश अपने-अपने हिसाब से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, जिससे टूरिस्ट उनके देश में आते हैं. लेकिन चीन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ अलग ही काम किया है. दरअसल, स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए चीन के एक गांव में एक विशाल क्यू-आर कोड बनाया गया है, जिसे आसमान से स्कैन किया जा सकता है. सोशल मीडिया पर इस क्यू-आर कोड की तस्वीरें वायरल हो रही हैं.
खास बात है कि विशाल क्यू-आर कोड बनाने में एक लाख से अधिक पेड़ों की जरूरत पड़ी. यह कोड शिलिनशुइ में तैयार किया गया है, जो चीन के हेबेइ प्रांत के बाओडिंग शहर में है. इस क्यू-आर कोड को गांव के वी-चैट ऑफिशियल अकाउंट से लिंक किया गया है. शंघाई एक्सपर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विशाल क्यू-आर कोड को 1,30,000 से अधिक चीनी जुनिपर पेड़ के साथ बनाया गया है और यह 227 मीटर लंबे मैदान में फैला हुआ है.
स्काइ डाइव करनेवाली सबसे बुजुर्ग महिला का वर्ल्ड रिकॉर्ड
स्काइ डाइविंग जितना रोमांचक होता है, इसमें उतना ही डर भी लगता है. इसके बावजूद साउथ ऑस्ट्रेलिया की एक १०१ वर्षीय वृद्ध महिला ने १४ हजार फुट की ऊंचाई से यह कारनामा कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. इस वृद्ध महिला का नाम इरीना ओशिया है. इरीना के इस कारनामे के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है. उन्होंने 14 हजार फुट की ऊंचाई से स्काइ डाइव कर सभी को हैरान कर दिया. इरीना ने 101 वर्ष 39 दिन की उम्र में यह छलांग लगायी. उन्हें जैसे ही प्लेन में बैठाया गया, वह काफी खुश थीं.
साउथ ऑस्ट्रेलिया स्थित एडिलेड के आसमान में 14 हजार फुट की ऊंचाई पर आते ही वह अपने एक साथी के साथ प्लेन से कूद गयीं. फिर उन्होंने जमीन पर आकर सेफ लैंडिंग की. इरीना सर्वाधिक ऊंचाई से स्काइ डाइव करनेवाली सबसे बुजुर्ग महिला अथवा पुरुष हैं. उनसे पहले यह रिकॉर्ड यूके के रहनेवाले वेरेन के नाम दर्ज था.
12 वर्षों में सूरज की सबसे तेज चमक
वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों 12 वर्षों से अधिक समय में सूरज की सबसे तेज चमक दर्ज की है. यह वर्ष 1996 में आधुनिक रिकॉर्ड शुरू करने के बाद से आठवीं सबसे तेज चमक है. ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ शेफ्फिल्ड और क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के शोधकर्ताओं के मुताबिक, बहुत बड़े पैमाने पर विकिरण निकलने की घटना अप्रत्याशित रूप से 6 सितंबर, 2017 को घटित हुई. हालांकि, पृथ्वी के सुरक्षात्मक वातावरण और सूरज से काफी अधिक दूरी के चलते इंसानों के लिए यह हानिकारक नहीं है. यह सबसे तेज चमक 48 घंटे से ज्यादा की अवधि के दौरान रिकॉर्ड की गयी. इस घटनाक्रम के कारण उपग्रह और जीपीएस सिग्नल पर असर हो सकता है.
