श्मशान में आये एक फोन ने बदल दी किस्मत, हाथ पर ‘चे ग्वेरा’ और दिल में ‘राम’, जानें बीजेपी विधायक शंकर घोष की अनसुनी कहानी

Shankar Ghosh Biography: बीजेपी विधायक शंकर घोष के जीवन की रोमांचक कहानी. श्मशान घाट से शुरू हुआ उनका बीजेपी का सफर और बांह पर आज भी मौजूद चे ग्वेरा के टैटू का राज. सिलीगुड़ी के सियासी समीकरण पर स्पेशल रिपोर्ट.

Shankar Ghosh Biography: राजनीति में रातों-रात तकदीर बदलने की कहानियां तो बहुत हैं, लेकिन शंकर घोष का किस्सा किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है. कभी उत्तर बंगाल में वामपंथी राजनीति (CPM) का चमकता चेहरा रहे शंकर घोष आज बीजेपी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में से एक हैं.

51 वर्षीय शंकर घोष ने न केवल अपनी विचारधारा बदली, बल्कि अपने राजनीतिक गुरु को हराकर यह साबित कर दिया कि वह उत्तर बंगाल की सियासत के नये ‘चाणक्य’ हैं. 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में वह एक बार फिर सिलीगुड़ी की पिच पर बड़ी लड़ाई के लिए तैयार हैं.

श्मशान घाट, जलती चिता और एक लाइफ चेंजिंग कॉल

शंकर घोष के ‘वाम’ से ‘राम’ होने की कहानी बड़ी नाटकीय है. दो बिंदुओं में उस पूरी कहानी को समझिये.

  • अंतिम संस्कार के बीच फैसला : 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, शंकर घोष एक सीपीएम कार्यकर्ता के शवदाह के लिए श्मशान घाट पर थे. वह चिता की आग के सामने खड़े थे, तभी उनके पास दार्जिलिंग के बीजेपी सांसद राजू बिष्ट का फोन आया.
  • विचारधारा का अंत : कहा जाता है कि उस एक फोन कॉल ने शंकर के मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व को खत्म कर दिया. उन्होंने अपनी बरसों पुरानी मार्क्सवादी विचारधारा को श्मशान की उसी ‘विद्युत भट्ठी’ में छोड़ दिया और हिंदुत्व की राह चुन ली.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

गुरु को हराया, अब मेयर से मुकाबला

2021 के विधानसभा चुनाव में शंकर घोष ने वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद कम ही लोगों को थी. उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु और सिलीगुड़ी के दिग्गज वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य को पटखनी दी और पहली बार विधायक बने.

विधानसभा में वाकपटुता और तर्कों के कारण वह नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के ‘दाहिने हाथ’ बन गये. उन्हें बीजेपी विधायक दल का मुख्य सचेतक (Chief Whip) बनाया गया. इस बार उनका मुकाबला सिलीगुड़ी के मेयर और कद्दावर नेता गौतम देव से है, जो इस लड़ाई को और भी हाई-प्रोफाइल बना रहा है.

इसे भी पढ़ें : सोनारपुर या रूपा-पुर? दक्षिण सोनारपुर फतह करने निकलीं ‘द्रौपदी’, जानें क्यों छप्पन भोग छोड़ मांगती हैं सिर्फ ‘अंडे की झोल’

Shankar Ghosh Biography: शंकर घोष की शख्सीयत का विरोधाभास

शंकर घोष की शख्सीयत में एक विरोधाभास आज भी जिंदा है, जो उनके शरीर पर अंकित है. शंकर घोष कभी क्रांतिकारी चे ग्वेरा के इतने बड़े प्रशंसक थे कि उन्होंने अपनी बायीं बांह पर उनका टैटू बनवा लिया था. आज झंडा लाल से भगवा हो गया, प्रतीक बदल गये, मंत्र भी बदल गये. लेकिन शंकर ने अपने हाथ से ‘चे ग्वेरा’ का वह टैटू नहीं हटाया. वह अपने शरीर पर इस अतीत को आज भी ढो रहे हैं, भले ही उनकी आत्मा अब हिंदुत्व में रमी हो.

इसे भी पढ़ें : मौसम की तरह बदली सियासत, विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा जाने वाली इकलौती नेता, कांग्रेस में वापसी का क्या है खेल?

विधानसभा सत्र के दौरान हमेशा धोती-कुर्ता पहने नजर आने वाले शंकर घोष बीजेपी के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जो रणनीति बनाने में माहिर माने जाते हैं. अब देखना यह है कि सिलीगुड़ी की जनता उनके इस ‘बदलाव’ पर दोबारा मुहर लगाती है या नहीं.

इसे भी पढ़ें

ममता बनर्जी को लड़ाई, लड़ाई, लड़ाई चाई : नंदीग्राम की हार के बाद भवानीपुर में ‘फाटाफाटी खेला’, 60 हजार का टार्गेट

शुभेंदु अधिकारी का ‘हिंदुत्व’ अवतार : श्रीखोल बजाकर संकीर्तन और 500 किमी का सफर, 35 साल तक नहीं देखी फिल्म

कटवा में ‘लाल गढ़’ पर दीदी का कब्जा, क्या युवा और किसान बिगाड़ेंगे खेल? जानें अजय-हुगली के संगम का सियासी मिजाज

कोलकाता, 24 परगना और हावड़ा की 91 सीटों से तय होगा ‘नबान्न का नवाब’, क्या दीदी का किला ढाह पायेगी भाजपा?

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >