Mamata Banerjee Naxalbari Rally: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए उत्तर बंगाल के दौरे पर पहुंचीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को मतदाता सूची (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला. नक्सलबाड़ी की चुनावी जनसभा में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पहली पूरक सूची (Supplementary List) में करीब 8 लाख मतदाताओं के नाम काट दिये गये. उन्होंने इसे भाजपा की ‘विनाशकारी नीति’ करार दिया. उन्होंने कहा कि वह बंगाल में किसी भी कीमत पर एनआरसी (NRC) लागू नहीं होने देंगी.
ममता बनर्जी ने पूछा- सूची की फिजिकल कॉपी कहां है?
बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से मांग की कि ऑनलाइन प्रकाशित पूरक सूची की भौतिक प्रतियां (Physical Copies) तत्काल सरकारी कार्यालयों में उपलब्ध करायी जायें. उन्होंने कहा कि जांच के दायरे में ाये 27 लाख में से 8 लाख वोटर के नाम काट दिये गये. अगर सूची जारी हो गयी है, तो सरकारी कार्यालयों को क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया. बिना फिजिकल कॉपी के वोटर का वेरिफिकेशन कैसे होगा?
SIR के कारण हुई 220 मौतें, भाजपा को शर्म आनी चाहिए – ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने एक चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि SIR के दौरान लाइन में खड़े होने और मानसिक तनाव के कारण पश्चिम बंगाल में 220 लोगों की मौत हुई. उन्होंने दावा किया कि मरने वालों में आधे हिंदू और आधे मुसलमान थे. हालांकि, इन मौतों का अब तक कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है.
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जब बुजुर्गों की नागरिकता पर सवाल उठाये गये और उन्हें लाइनों में खड़ा किया गया, तब भाजपा किस मुंह से उनसे वोट मांगने आयेगी?
ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
Mamata Banerjee Naxalbari Rally: ममता ने खेला राजबंशी और आदिवासी कार्ड
दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी बेल्ट में चुनावी गणित साधते हुए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर आदिवासी और राजबंशी समुदायों के नाम मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर हटाये गये हैं. उन्होंने याद दिलाया कि इन समुदायों के लिए केवल तृणमूल कांग्रेस सरकार ही कल्याणकारी योजनाएं लेकर आयी हैं.
बंगाल में न एनआरसी, न डिटेंशन कैंप – ममता बनर्जी
अपनी रैली के अंत में ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए घोषणा की कि जब तक ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, यहां न तो एनआरसी (NRC) का काम होगा और न ही किसी को निरुद्ध शिविर (Detention Camp) में जाने दिया जायेगा.
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