पहाड़ों के ऊपर से उड़कर पहुंचेंगे कर्सियोंग से दार्जिलिंग, 45 मिनट में पूरी होगी 5 घंटे की यात्रा, 3000 करोड़ का है प्रोजेक्ट

Kurseong Darjeeling Ropeway: दार्जिलिंग और कर्सियोंग के बीच 3,000 करोड़ रुपए की लागत से रोप-वे बनाने की तैयारी. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद 5 घंटे का सफर 45 मिनट में पूरा होगा. जानें पूरी योजना.

उत्तर बंगाल की वादियों में घूमने जाने वाले सैलानियों के लिए एक अच्छी खबर है. पहाड़ों की रानी दार्जिलिंग जाने वाले पर्यटकों को अब घंटों ट्रैफिक जाम का सामना नहीं करना होगा. पश्चिम बंगाल सरकार कर्सियोंग और दार्जिलिंग के बीच एक विशाल रोप-वे परियोजना शुरू करने की योजना बना रही है. इस परियोजना के साकार होने पर दोनों हिल स्टेशनों के बीच के 5 घंटे का उबाऊ सफर मात्र 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा.

32 किमी की दूरी तय करने में लगते हैं 4-5 घंटे

पर्यटन के पीक सीजन (विशेषकर मई-जून और अक्टूबर-नवंबर) के दौरान सिलीगुड़ी से कर्सियोंग तक का सफर 2 घंटे में पूरा हो जाता है, लेकिन कर्सियोंग से दार्जिलिंग के बीच की 32 किलोमीटर की दूरी तय करने में पर्यटकों को 4 से 5 घंटे तक जाम से जूझना पड़ता है.

कर्सियोंग से दार्जिलिंग के लिए केवल एक सड़क

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सिलीगुड़ी से कर्सियोंग तक पहुंचने के लिए 3 अलग-अलग सड़कें (हिल कार्ट रोड, रोहिणी रोड और पंखाबाड़ी रोड) उपलब्ध हैं, जिससे वाहन आसानी से कर्सियोंग पहुंच जाते हैं. हालांकि, कर्सियोंग से दार्जिलिंग के बीच केवल एक ही प्रमुख सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग 110 (NH-110 या हिल कार्ट रोड) उपलब्ध है. दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण इस मार्ग पर नयी चौड़ी सड़क बनाना भी संभव नहीं है. इसलिए हवा में तैरते इस परिवहन तंत्र को तैयार किया जा रहा है.

ये भी पढ़ें: दार्जिलिंग-कर्सियोंग-कलिम्पोंग में वर्षा का कहर, भू-स्खलन से थमी पहाड़ की रफ्तार, 4 की मौत

BOOT मॉडल पर बनेगी 3,000 करोड़ की परियोजना

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) पूरा कर लिया गया है. इसे पूरी तरह से व्यावहारिक पाया गया है.

  • अनुमानित लागत : 3,000 करोड़ रुपए.
  • मॉडल : BOOT (Build Own Operate Transfer) यानी ‘बनाओ, चलाओ और हस्तांतरित करो’ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल.
  • स्टेशन : कर्सियोंग से दार्जिलिंग के बीच लगभग 4 से 5 इंटरमीडिएट स्टेशन बनाये जायेंगे. वहां से पर्यटक अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों के लिए भी आ-जा सकेंगे.

सड़क मार्ग बनाम प्रस्तावित रोप-वे

मानकवर्तमान सड़क मार्ग (NH-110)प्रस्तावित रोप-वे प्रणाली
यात्रा का समय (पीक सीजन)4 से 5 घंटे (कभी-कभी 6 घंटे तक)मात्र 45 मिनट
मार्ग की लंबाईलगभग 32 किलोमीटरसीधा हवाई मार्ग (लगभग 20-22 किमी)
जाम की संभावनाअत्यधिक (सड़क संकरी होने के कारण)शून्य (केबल कार प्रणाली)
सब्जी व सामान परिवहनभारी ट्रकों के कारण सड़क पर दबावरात के समय सामान ढोने की योजना

रात में जरूरी सामान की होगी आपूर्ति

इस रोप-वे का उपयोग केवल पर्यटन तक ही सीमित नहीं रहेगा. राज्य सरकार की योजना है कि रात के समय इस केबल कार का उपयोग दार्जिलिंग शहर के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री, खाद्यान्न और ताजी सब्जियों की आपूर्ति के लिए भी किया जायेगा. इससे दिन के समय सड़क पर भारी वाहनों का दबाव काफी कम हो जायेगा.

ये भी पढ़ें: शुभेंदु अधिकारी सरकार बदलेगी पहाड़ों की सूरत, दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी समेत 5 शहर बनेंगे ‘हिमालयी पर्वतीय शहर’

कलिम्पोंग से गंगटोक को भी जोड़ने की तैयारी

दार्जिलिंग-कर्सियोंग रोप-वे परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद, राज्य सरकार कलिम्पोंग और सिक्किम की राजधानी गंगटोक के बीच भी इसी प्रकार की रोप-वे सेवा शुरू करने पर विचार कर रही है.

कलिम्पोंग-गंगटोक परियोजना को केंद्रीय मदद मिलने की उम्मीद

वर्तमान में सिलीगुड़ी से गंगटोक जाने के लिए यात्री मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग 10 (NH-10) पर निर्भर रहते हैं, जो भू-स्खलन के कारण अक्सर बंद रहता है. चूंकि यह इलाका चीन सीमा के करीब है और केंद्र सरकार सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है, इसलिए इस परियोजना में केंद्र से भी पूर्ण सहयोग मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है.

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल की कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि, दार्जिलिंग मंदारिन संतरे को मिला जीआई टैग

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं.

अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है.

वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं.

भौगोलिक विशेषज्ञता : वर्तमान में उनका फोकस पश्चिम बंगाल है. उन्होंने झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की खबरों पर भी काम किया है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है.

मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :-

राज्य की राजनीति और शासन : वर्पतमान में श्चिम बंगाल की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज.

सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग.

जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित रिपोर्टिंग.

डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है.

विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर पत्रकारिता, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव और तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >