उत्तर बंगाल की वादियों में घूमने जाने वाले सैलानियों के लिए एक अच्छी खबर है. पहाड़ों की रानी दार्जिलिंग जाने वाले पर्यटकों को अब घंटों ट्रैफिक जाम का सामना नहीं करना होगा. पश्चिम बंगाल सरकार कर्सियोंग और दार्जिलिंग के बीच एक विशाल रोप-वे परियोजना शुरू करने की योजना बना रही है. इस परियोजना के साकार होने पर दोनों हिल स्टेशनों के बीच के 5 घंटे का उबाऊ सफर मात्र 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा.
32 किमी की दूरी तय करने में लगते हैं 4-5 घंटे
पर्यटन के पीक सीजन (विशेषकर मई-जून और अक्टूबर-नवंबर) के दौरान सिलीगुड़ी से कर्सियोंग तक का सफर 2 घंटे में पूरा हो जाता है, लेकिन कर्सियोंग से दार्जिलिंग के बीच की 32 किलोमीटर की दूरी तय करने में पर्यटकों को 4 से 5 घंटे तक जाम से जूझना पड़ता है.
कर्सियोंग से दार्जिलिंग के लिए केवल एक सड़क
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सिलीगुड़ी से कर्सियोंग तक पहुंचने के लिए 3 अलग-अलग सड़कें (हिल कार्ट रोड, रोहिणी रोड और पंखाबाड़ी रोड) उपलब्ध हैं, जिससे वाहन आसानी से कर्सियोंग पहुंच जाते हैं. हालांकि, कर्सियोंग से दार्जिलिंग के बीच केवल एक ही प्रमुख सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग 110 (NH-110 या हिल कार्ट रोड) उपलब्ध है. दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण इस मार्ग पर नयी चौड़ी सड़क बनाना भी संभव नहीं है. इसलिए हवा में तैरते इस परिवहन तंत्र को तैयार किया जा रहा है.
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BOOT मॉडल पर बनेगी 3,000 करोड़ की परियोजना
राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) पूरा कर लिया गया है. इसे पूरी तरह से व्यावहारिक पाया गया है.
- अनुमानित लागत : 3,000 करोड़ रुपए.
- मॉडल : BOOT (Build Own Operate Transfer) यानी ‘बनाओ, चलाओ और हस्तांतरित करो’ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल.
- स्टेशन : कर्सियोंग से दार्जिलिंग के बीच लगभग 4 से 5 इंटरमीडिएट स्टेशन बनाये जायेंगे. वहां से पर्यटक अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों के लिए भी आ-जा सकेंगे.
सड़क मार्ग बनाम प्रस्तावित रोप-वे
| मानक | वर्तमान सड़क मार्ग (NH-110) | प्रस्तावित रोप-वे प्रणाली |
| यात्रा का समय (पीक सीजन) | 4 से 5 घंटे (कभी-कभी 6 घंटे तक) | मात्र 45 मिनट |
| मार्ग की लंबाई | लगभग 32 किलोमीटर | सीधा हवाई मार्ग (लगभग 20-22 किमी) |
| जाम की संभावना | अत्यधिक (सड़क संकरी होने के कारण) | शून्य (केबल कार प्रणाली) |
| सब्जी व सामान परिवहन | भारी ट्रकों के कारण सड़क पर दबाव | रात के समय सामान ढोने की योजना |
रात में जरूरी सामान की होगी आपूर्ति
इस रोप-वे का उपयोग केवल पर्यटन तक ही सीमित नहीं रहेगा. राज्य सरकार की योजना है कि रात के समय इस केबल कार का उपयोग दार्जिलिंग शहर के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री, खाद्यान्न और ताजी सब्जियों की आपूर्ति के लिए भी किया जायेगा. इससे दिन के समय सड़क पर भारी वाहनों का दबाव काफी कम हो जायेगा.
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कलिम्पोंग से गंगटोक को भी जोड़ने की तैयारी
दार्जिलिंग-कर्सियोंग रोप-वे परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद, राज्य सरकार कलिम्पोंग और सिक्किम की राजधानी गंगटोक के बीच भी इसी प्रकार की रोप-वे सेवा शुरू करने पर विचार कर रही है.
कलिम्पोंग-गंगटोक परियोजना को केंद्रीय मदद मिलने की उम्मीद
वर्तमान में सिलीगुड़ी से गंगटोक जाने के लिए यात्री मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग 10 (NH-10) पर निर्भर रहते हैं, जो भू-स्खलन के कारण अक्सर बंद रहता है. चूंकि यह इलाका चीन सीमा के करीब है और केंद्र सरकार सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है, इसलिए इस परियोजना में केंद्र से भी पूर्ण सहयोग मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है.
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