अस्पताल के लिए एक एकड़ जमीन तोहफे में दी

सिलीगुड़ी. ग्रामीणों की सुविधा के लिए सरकारी अस्पताल के निर्माण के वास्ते एक व्यक्ति ने अपनी करीब एक एकड़ जमीन राज्य सरकार को तोहफा में दे दी. सरकार को इतना बड़ा तोहफा देनेवाला शहर के जाने-माने फिजीशियन डॉ प्रेम दोरजी भूटिया का परिवार है. कालिम्पोंग जिले के शेरपा गांव निवासी डॉ भूटिया की मां मधु […]

सिलीगुड़ी. ग्रामीणों की सुविधा के लिए सरकारी अस्पताल के निर्माण के वास्ते एक व्यक्ति ने अपनी करीब एक एकड़ जमीन राज्य सरकार को तोहफा में दे दी. सरकार को इतना बड़ा तोहफा देनेवाला शहर के जाने-माने फिजीशियन डॉ प्रेम दोरजी भूटिया का परिवार है. कालिम्पोंग जिले के शेरपा गांव निवासी डॉ भूटिया की मां मधु भूटिया ने परिवार की ओर से सरकार को जमीन तोहफे में दी. पूरा गांव इस परिवार की प्रशंसा करते नहीं थक रहा.
मिली जानकारी के अनुसार, कालिम्पोंग शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर पहाड़ों के बीच शेरपा गांव बसा है. इस गांव की जनसंख्या दस हजार के करीब है. लेकिन यहां चिकित्सा की कोई व्यवस्था सुलभ नहीं है. चिकित्सा के लिए गांव के लोगों को कम से कम 50 किलोमीटर दूर कालिम्पोंग आना होता है. गंभीर बीमारी होने पर करीब 80 किलोमीटर दूर सिलीगुड़ी आना होता है. कुछ वर्ष पहले राज्य सरकार ने गांव में एक छोटा सा हेल्थ सेंटर बनाया था, लेकिन वह अधिकतर बंद ही रहता है.
ग्रामीणों की मांग पर राज्य सरकार एक अस्पताल बनाने को तत्पर हुई, तो जमीन नहीं मिली. इसके बाद मधु भूटिया के परिवार ने करीब बीस लाख की संपत्ति राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग को उपहार स्वरूप सौंप दी. मधु भूटिया के अलावा उनके चार बेटे टीएन भूटिया, दोरजी भूटिया, नॉरदेन भूटिया व पीडी भूटिया ने भी स्वेच्छा से उपहार के दस्तावेज पर दस्तखत कर दिये.

पीडी भूटिया अभी सिलीगुड़ी के निकट माटिगाड़ा स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत होने के साथ पूरे उत्तर बंगाल के मशहूर जनरल फिजीशियन हैं. पर्यावरण के साथ उनका लगाव देखकर राज्य वन विभाग ने डॉ भूटिया को वाइल्ड लाइफ वार्डन नियुक्त किया है.
डॉ भूटिया ने बताया कि गांव में अस्पताल ना होने की वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या या अस्वस्थता की वजह से लोगों को कालिम्पोंग, मालबाजार या सिलीगुड़ी आना पड़ता है. राज्य सरकार गांव में एक अस्पताल बनाने को राजी हुई, तो जमीन नहीं मिल रही थी. गांव में एक सरकारी अस्पताल बनाने के लिए पूरे परिवार ने मिलकर यह निर्णय लिया और करीब एक एकड़ (.85 एकड़) जमीन स्वास्थ्य विभाग को उपहार स्वरूप सौंप दी. इस जमीन की वर्तमान मूल्य बीस लाख रुपये से अधिक है.

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