बालूरघाट: साल 2012 में कोलकाता के आमरी अस्पताल में हुए अग्निकांड से सबक लेते हुए दक्षिण दिनाजपुर जिले के 1184 प्राथमिक विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्यूसर) लगाये गये थे. सभी स्कूलों को दो-दो यंत्र दिये गये थे. 2012 में लगे इन अग्निशमन यंत्रों की एक्सपायरी पूरी हो चुकी है, लेकिन उनकी रीफिलिंग नहीं की गई. ऐसे में किसी अग्निकांड की स्थिति में इन यंत्रों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. यह मामला जिला प्रशासन की नजर में आने के बाद वह हरकत में आया है.
प्राथमिक स्कूलों में अग्निशमन यंत्र लगाने का मकसद यह था कि वहां छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते हैं, जो आग लगने पर अपना बचाव करने में सक्षम नहीं होते. इसके अलावा प्राथमिक स्कूलों में मिड डे मील के तहत खाना भी पकता है. इस दौरान आग लगने की आशंका बनी रहती है. स्कूल के शिक्षकों को अग्निशमन यंत्रों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया गया था.
जानकारी के मुताबिक पांच साल पहले लगाये गये अग्निशमन यंत्रों की एक्सपायरी काफी पहले हो चुकी है. लेकिन प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया. जिला विद्यालय निरीक्षक (प्राथमिक) की नजर में इस बात को प्राथमिक शिक्षक काफी पहले ही लाये थे. लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया.
अब इस मामले की खबर जिला अधिकारी संजय बसु को मिली है. उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्हें इस बारे में जानकारी मिली है. बीडीओ और डीआई को रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है. बहुत जल्द ही सभी अग्निशमन यंत्रों की रीफिलिंग करायी जायेगी.
