शिक्षा, स्वास्थ्य, शिशु सुरक्षा से जुड़ेंगे एसएचजी

मालदा. पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल वापस लाने, सांस्थानिक प्रसव को बढ़ाने और बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने में प्रशासन 33 हजार स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को लगा रहा है. जिला प्रशासन शिक्षा, स्वास्थ्य और शिशु सुरक्षा, इन तीन चीजों पर सबसे ज्यादा जोर देना चाह रहा है. बीते साल के सितंबर महीने में […]

मालदा. पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल वापस लाने, सांस्थानिक प्रसव को बढ़ाने और बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने में प्रशासन 33 हजार स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को लगा रहा है. जिला प्रशासन शिक्षा, स्वास्थ्य और शिशु सुरक्षा, इन तीन चीजों पर सबसे ज्यादा जोर देना चाह रहा है.

बीते साल के सितंबर महीने में मालदा जिला प्रशासन ने यह पहल शुरू की. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी ‘मिशन उत्कर्ष’ नाम से मैदान में उतर गये. लेकिन प्रशासन यहीं पर नहीं रुकना चाहता. वह स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पूरे साल ‘मिशन उत्कर्ष’ को चालू रखना चाहता है.

स्वयं सहायता समूहों के बीच से मास्टर ट्रेनर तैयार किये गये हैं. ये मास्टर ट्रेनर ग्राम पंचायत इलाकों में जाकर विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को प्रशिक्षण देंगे. मालदा जिले में कुल 33 हजार स्वयं सहायता समूह हैं. इनके सदस्यों की संख्या करीब चार लाख है. एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि इन स्वयं सहायता समूहों में पूरे के पूरे परिवार शामिल हैं. अगर ये पहल करते हैं, तो काफी फायदा होगा.

बच्चों को स्कूल वापस लाने, शिक्षा, स्वास्थ्य, शिशु सुरक्षा के मामले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. स्वस्थ मां-बच्चे के लिए बच्चों के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर रखना बहुत जरूरी है. यही वैज्ञानिक धारणा है. यह बात स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ग्रामीण महिलाओं को सरकारी कर्मियों के मुकाबले बेहतर ढंग से समझा सकती हैं. इसके अलावा बाल विवाह और मानव तस्करी को भी रोकना है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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