प्लास्टिक अंडा: उत्तर बंगाल के लोगों में अंडे को लेकर घबराहट, उड़ी शासन-प्रशासन की नींद
सिलीगुड़ी. बड़े पैमाने पर प्लास्टिक के अंडों की बरामदगी से उत्तर बंगाल के लोग सकते में हैं. मीडिया की सुर्खियों में छाये प्लास्टिक अंडों की वजह से शासन-प्रशासन की नींद उड़ गयी है. सिलीगुड़ी नगर निगम भी हरकत में आ गया है. सोमवार को निगम के खाद्य आपूर्ति विभाग और विरोधी दल तणमूल कांग्रेस के […]
सिलीगुड़ी. बड़े पैमाने पर प्लास्टिक के अंडों की बरामदगी से उत्तर बंगाल के लोग सकते में हैं. मीडिया की सुर्खियों में छाये प्लास्टिक अंडों की वजह से शासन-प्रशासन की नींद उड़ गयी है. सिलीगुड़ी नगर निगम भी हरकत में आ गया है. सोमवार को निगम के खाद्य आपूर्ति विभाग और विरोधी दल तणमूल कांग्रेस के पार्षदों ने सिलीगुड़ी के बाजारों में अलग-अलग मुहिम चलायी.
निगम में नेता प्रतिपक्ष रंजन सरकार उर्फ राणा दा की अगुवाई में 12 नंबर वार्ड के तृणमूल पार्षद नांटू पाल, मंजूश्री पाल, कृष्णचंद्र पाल समेत कई पार्षदों ने विधान मार्केट के अंडा कारोबारियों से मुलाकात की. अंडा बेचनेवालों से प्लास्टिक अंडों के बारे में विस्तृत जानकारी ली गयी. साथ ही विक्रेताओं ने अंडे फोड़कर और आमलेट-पोच बनाकर अंडों के नकली न होने की पुष्टि की.
सिलीगुड़ी नगर निगम के खाद्य आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर गणेश भट्टाचार्य ने भी स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम के साथ विधान मार्केट के सब्जी बाजार, मुर्गी हट्टी व अन्य बाजारों में जाकर अंडों की जांच की. हालांकि कहीं से भी प्लास्टिक अंडों की बरामदगी नहीं हो सकी. गणेश भट्टाचार्य ने कारोबारियों को सचेत करते हुए कहा कि अगर कहीं पर भी प्लास्टिक अंडे बिक्री होने की जानकारी मिले, तो फौरन निगम या फिर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें. श्री भट्टाचार्य का कहना है कि प्लास्टिक से बने कृत्रिम अंडे कहां से बाजारों में आ रहे हैं और कौन सिलीगुड़ी समेत पूरे उत्तर बंगाल के बाजारों में इन्हें फैला रहा है, इस बारे में फिलहाल कुछ भी कह पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि प्लास्टिक से बने अंडे देसी और पोल्ट्री अंडों से पूरी तरह मिलते-जुलते हैं. कृत्रिम अंडे स्वास्थ्य के लिए भी काफी हानिकारक हैं.
अंडे के कारोबार पर भी लग रहा ग्रहण: कोलकाता से लेकर पूरे उत्तर बंगाल में प्लास्टिक अंडे पाये जाने की घटनाओं ने अंडे के कारोबार पर ग्रहण लगा दिया है. सिलीगुड़ी के विधान मार्केट के एक खुदरा अंडा विक्रेता बबलू मंडल के अनुसार, पूजा के इस मौसम में यूं भी अंडों की बिक्री कम ही होती है. लेकिन इसके बावजूद प्रत्येक साल इस अवधि में हर रोज वह अकेले 10-12 कैरेट अंडों की बिक्री कर लेते थे. लेकिन जब से प्लास्टिक अंडों ने बवाल मचाया है तब से अचानक बाजार में भूचाल आ गया है. श्री मंडल का कहना है कि अब हर रोज एक-दो कैरेट अंडे बिक्री करना भी भारी हो गया है. सिलीगुड़ी में अंडों के थोक विक्रेता निर्मल दास का कहना है कि वह काफी वर्षों से वह चंपासारी बाजार में अंडों का कारोबार करते आ रहे हैं. लेकिन अंडों की बिक्री में इतनी गिरावट अब से पहले कभी देखने को नहीं मिली. उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का अंडा उन्होंने अब तक नहीं देखा है.