चुनाव के समय वोट मांगने के लिए नेता जब इस गांव में आते हैं तब भी यहां के आदिवासी विधवा भत्ता तथा वृद्धा भत्ता देने की मांग करते हैं. तमाम उम्मीदवार चुनाव बाद ही इस समस्या को दूर करने का वादा करते हैं. एक बार चुनाव खत्म होते ही नेता अपने वादे भूल जाते हैं. इस बीच, इस गांव के आदिवासियों को स्वनिर्भर समूह की सहायता से रोजी-रोटी दिलाने की कोशिश की जा रही है. उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज से इस गांव की दूरी करीब चार किलोमीटर है. इस गांव के अधिकांश लोग काफी गरीब हैं.
कई-कई तो दो जून की रोटी भी नहीं जुटा पाते है. इसी वजह से यहां के वृद्ध लोग विधवा तथा वृद्धा भत्ता लेने की कोशिश में लगे हुए हैं. इस गांव के आदिवासियों का मुख्य कारोबार अवैध चुल्लू शराब बनाना है. पिछले काफी दिनों से चुल्लू शराब के खिलाफ आबकारी विभाग ने मुहिम छेड़ रखी है. आबकारी विभाग के अधिकारियों ने कई बार इस गांव में छापामारी की. इस दौरान कुछ लोग पकड़े भी गये. अब आदिवासी चुल्लू शराब बनाने का काम नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे लोगों के सामने भूखमरी की स्थिति बन गई है. गांव की हालत भी काफी खराब है. करीब-करीब सभी मकान कच्चा है. सड़कें भी बदहाल है. सभी घरों में कोई न कोई वृद्ध है. कुछ युवा लोग मेहनत मजदूरी करने बाहर चले गये हैं. कई आदिवासी वृद्ध ऐसे हैं जिनके बच्चे कमाने के लिए बाहर गये, लेकिन वापस नहीं लौटे हैं. वह लोग परिवार के गुजारे के लिए पैसे भी नहीं भेजते. ऐसे वृद्धों के सामने रोजी-रोटी संकट है.
स्थानीय लोगों ने सरकार पर अवहेलना का आरोप लगाया है. पानी तथा चिकित्सा सेवा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी इन आदिवासियों को नहीं मिल रही है. इस संबंध में जब कालियागंज के बीडीओ मोहम्मद जकारिया से बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा कि शेषगांव के आदिवासियों के समस्या की जानकारी उन्हें भी मिली है. आदिवासियों की मदद की कोशिश की जा रही है. जरूरतमंदों को विधवा तथा वृद्धा भत्ता दिया जायेगा. इसके अलावा आदिवासियों को रोजी-रोटी कमाने के साधन भी उपलब्ध कराये जायेंगे. स्वनिर्भर समूह की सहायता से काम करने वाले आदिवासियों को काम पर लगाया जायेगा. बीडीओ चाहे कुछ भी कहें, लेकिन इस गांव के लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है. गांव वालों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार अधिकारी आश्वासन देकर जा चुके हैं. उसका कोई लाभ नहीं हुआ है. इस बार भी शायद बीडीओ का आश्वासन भी आश्वासन ही बनकर रह जायेगा.
