न्यायमूर्ति कर्णन ने जमानती वारंट लेने से किया इनकार

कोलकाता: राज्य के पुलिस महानिदेशक, कोलकाता व विधाननगर पुलिस आयुक्त शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अवमानना मामले में कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश सीएस कर्णन को जमानती वारंट देने उनके घर पहुंचे. लेकिन उन्होंने वारंट को लेने से इनकार कर दिया. हालांकि उन्हें यह जमानती वारंट देने के लिए पुलिस लगभग 100 सौ जवानों को […]

कोलकाता: राज्य के पुलिस महानिदेशक, कोलकाता व विधाननगर पुलिस आयुक्त शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अवमानना मामले में कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश सीएस कर्णन को जमानती वारंट देने उनके घर पहुंचे. लेकिन उन्होंने वारंट को लेने से इनकार कर दिया. हालांकि उन्हें यह जमानती वारंट देने के लिए पुलिस लगभग 100 सौ जवानों को अपने साथ लेकर गयी थी. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश सीएस कर्णन के खिलाफ जमानती वारंट जारी किये हैं और 10 हजार का निजी मुचलका भी भरने के आदेश दिये हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को वारंट की तामील कराने को कहा है.
क्या है मामला : गौरतलब है कि 31 मार्च को जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के आदेश दिये गये हैं. जस्टिस कर्णन अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद न तो पेश हुए और न ही कोई जवाब दिया. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की पिछली सुनवाई में सीजेआइ खेहर ने कहा कि जस्टिस कर्णन ने आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में फैक्स भेजकर चीफ जस्टिस और जजों से मीटिंग की अपील की थी, लेकिन इसे जवाब नहीं माना जा सकता.

फैक्स में जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा कि उन्हें प्रशासनिक कामों की इजाजत दी जाये. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह मानने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अगुवाईवाली सात जजों की बेंच पर सवाल उठाते हुए जस्टिस कर्णन ने उस पर दलित-विरोधी होने का आरोप लगाया है. जस्टिस कर्णन ने अप्रत्यक्ष रूप से सुप्रीम कोर्ट पर दलित- विरोधी होने का आरोप लगाते हुए उनके केस को संसद रेफर करने के लिए कहा है. न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब हाइकोर्ट के सिटिंग जज को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की बेंच ने अवमानना नोटिस जारी किया गया.

क्या कहा न्यायाधीश कर्णन ने : वारंट लेने से इनकार करते हुए न्यायाधीश सीएस कर्णन ने कहा कि पूरा विश्व सुप्रीम कोर्ट के व्यवहार पर हंस रहा है, जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट उनके साथ व्यवहार कर रहा है, यह सही नहीं. क्या वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे या नहीं, इस संबंध में उन्होंने कहा कि वह इस पर विचार करेंगे. साथ ही उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि वह उन सभी सात जजों के खिलाफ मानहानि का मामला करेंगे, जिन्होंने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही मामले से उन पर मानसिक संतुलन व सामाजिक जीवन पर आघात पहुंचा है, इसके लिए वह 14 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग करेंगे.

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