जिला स्वास्थ्य विभाग ने की कार्रवाई
सिलीगुड़ी के नर्सिंगहोमों में हड़कंप
सिलीगुड़ी : उचित ढांचागत बुनियादी सुविधाओं व उचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से दार्जिलिंग जिला स्वास्थ विभाग ने सिलीगुड़ी के कुल 22 निजी नर्सिंगहोम व पैथालॉजी सेंटरों का लाइसेंस रद्द कर दिया है. अगले 15 से 20 दिन में जिला स्वास्थ विभाग ने क्लिनिकल एसेसमेंट एक्ट के निर्देशानुसार सभी व्यवस्था सुदृढ़ कर फिर से लाइसेंस के लिए आवेदन करने को कहा है. स्वास्थ विभाग के इस कदम से यहां के निजी अस्पतालों तथा पैथोलॉजी सेंटरों में हड़कंप है.
उल्लेखनीय है कि निजी अस्पताल, नर्सिंगहोम व पैथोलॉजी सेंटर बुनियादी ढांचागत व्यवस्था सुदृढ़ किये बगैर ही लाइसेंस के लिये आवेदन करते हैं. सिस्टम की लापरवाही और धांधली की वजह से लाइसेंस भी मिल जाता है. गौर करने वाली बात यह है कि निजी अस्पतालों व नर्सिंगहोम की बदहाल व्यवस्था आंखो से देखने के बाद भी लोग वहां से इलाज कराते हैं.
पिछले कुछ वर्षों में नर्सिंगहोम, निजी अस्पातल व पैथालॉजी सेंटर बेलगाम हो गए हैं. रोगियों से मनमाना रकम लेना, चिकित्सा में लापरवाही, आइसीयू और सीसीयू के नाम लूट का काम धड़ल्ले से चल रहा था. काफी शिकायतें मिलने के बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन पर लगाम लगाने की प्रक्रिया शुरू की है. दार्जिलिंग जिला स्वास्थ विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष कुल 170 लाइसेंस का नवीनीकरण होना था. इसमें से 114 संस्थानों की व्यवस्था कानूनन सही पायी गयी. इनके लाइसेंस को रिन्यु कर दिया गया.
अन्य 22 संस्थान जांच के घेरे में फंस गये. इन 22 संस्थानों की जांच की गयी और पाया गया कि यहां ढांचागत बुनियादी सुविधाओं का भारी आभाव है. इसके अलावा यहां क्लिनिकल एसेसमेंट एक्ट की भी अवहेलना की गयी. जिसके आधार पर इन 22 संस्थानो का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है.
दार्जिलिंग जिला मुख्य स्वास्थ अधिकारी डा असित विश्वास ने बताया कि इन 22 संस्थानों को अगले 15 से 20 दिनों के अंदर पूरी व्यवस्था सुदृढ़ कर फिर से लाइसेंस के लिये आवेदन करने को कहा गया है.
निजी अस्पताल, नर्सिंगहोम और पैथोलॉजी सेंटर को बिना लाइसेंस के अधिक दिनों तक चलने नहीं दिया जा सकता. श्री विश्वास ने कहा कि क्लिनिकल एसेसमेंट एक्ट की अवहेलना के अतिरिक्त इलाज के नाम पर रोगी के परिजनों से रुपया ऐंठना, आइसीयू, सीसीयू, ऑक्सीजन के नाम पर अधिक फीस लेने की भी शिकायतें मिली है. इसके अतिरिक्त कई निजी अस्पताल व नर्सिंगहोम के खिलाफ इलाज में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है. प्रत्येक मामले की जांच के लिये टीम बनायी जा रही है. जांच कमिटी की रिपोर्ट के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जायेगी.
