दार्जिलिंग जिले के चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर मृणाल घोष तथा चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य डॉक्टर देवाशीष चंदा की गिरफ्तारी से यह साबित हो गया है कि शिशु तस्करी मामले के तार जलपाईगुड़ी के साथ ही दार्जिलिंग जिले से भी जुड़ गये हैं. पहली बार इस मामले में किसी सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी हुई है. इन दोनों पर आरोप यह है कि दार्जिलिंग जिले में बरामद अनाथ शिशुओं को यह लोग जलपाईगुड़ी स्थित चंदना चक्रवर्ती के होम भेज देते थे. चंदना चक्रवर्ती जलपाईगुड़ी में बिमला शिशु गृह तथा नॉर्थ बंगाल पीपुल्स डेवलपमेंट नाम से होम चलाती हैं.
शिशु तस्करी कांड: दार्जिलिंग जिले में भी खलबली
सिलीगुड़ी: जलपाईगुड़ी में चंदना चक्रवर्ती द्वारा संचालित होम से शिशु तस्करी का मामला सामने आने के बाद से ही हर ओर खलबली मची हुई है. इसमें भाजपा नेता जूही चौधरी की भी गिरफ्तारी हुई है. अब तक यह पूरा मामला जलपाईगुड़ी जिले के ही इर्द-गिर्द घुम रहा था. लेकिन अब इसकी आंच दार्जिलिंग जिले पर […]

सिलीगुड़ी: जलपाईगुड़ी में चंदना चक्रवर्ती द्वारा संचालित होम से शिशु तस्करी का मामला सामने आने के बाद से ही हर ओर खलबली मची हुई है. इसमें भाजपा नेता जूही चौधरी की भी गिरफ्तारी हुई है. अब तक यह पूरा मामला जलपाईगुड़ी जिले के ही इर्द-गिर्द घुम रहा था. लेकिन अब इसकी आंच दार्जिलिंग जिले पर भी पड़ने लगी है.
शिशु तस्करी का मामला सामने आने के बाद चंदना चक्रवर्ती की गिरफ्तारी हो चुकी है और उसके होम को भी सील कर दिया गया है. इस बीच, दार्जिलिंग जिले के एक अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद यहां के प्रशासनिक हलकों में खलबली मची हुई है.
दार्जिलिंग के जिला अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि पिछले दिनों दार्जिलिंग जिला चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के गतिविधियों की जांच की गई थी और काम-काज में कई अनियमितता पाये गये थे. उसके बाद ही डीसीपीओ तथा सीडब्ल्यूसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है. श्री श्रीवास्वतव ने आगे बताया है कि दार्जिलिंग जिले से शिशुओं को जलपाईगुड़ी होम में भेजने को लेकर यह कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और आज शनिवार तक इस नोटिस का जवाब देना था. हालांकि उन्होंने डीसीपीओ मृणाल घोष की गिरफ्तारी पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया. इस बीच, सिलीगुड़ी के विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिशु तस्करी के इतने बड़े मामले के खुलासा होने पर आश्चर्य जाहिर किया है और पूरे मामले की जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है.
वेस्ट बंगाल वोलंटियरी ब्लड डोनर फोरम के महासचिव तथा प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोमनाथ चटर्जी ने इस पूरे मामले में मानव अंग तस्कर गिरोह के भी जुड़े होने की आशंका जाहिर की है. उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी पिछले कई वर्षों से सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कई अनाथ बच्चों को बरामद कर सिलीगुड़ी अस्पताल में भरती कराया है. बाद में उन बच्चों को सीडब्ल्यूसी की सहायता से विभिन्न होमों में भेजने की व्यवस्था की गई. ये तमाम बच्चे अभी कहां हैं, पहले इस तथ्य का पता लगाना बेहद जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि चंदना चक्रवर्ती ने लाखों रुपये लेकर शिशुओं को बेच दिया है. यह शिशु भी अभी कहां हैं. प्रशासन तथा सीआइडी को चंदना चक्रवर्ती द्वारा बेचे गये शिशुओं की जानकारी जुटानी चाहिए. यह भी हो सकता है कि इन बच्चों के अंगों की तस्करी की गई हो. उन्होंने आगे बताया कि सिलीगुड़ी शहर में ही करीब एक दर्जन से अधिक होम हैं.
पूरे दार्जिलिंग जिले में ऐसे होमों की संख्या दो दर्जन से भी अधिक होगी. सीआइडी को एक-एक कर तमाम होमों की जांच करनी चाहिए. यहां उल्लेखनीय है कि सीआइडी ने शुक्रवार को दार्जिलिंग जिले के चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर मृणाल घोष तथा सीडब्ल्यूसी सदस्य डॉक्टर देवाशीष चंदा को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय पिंटेल विलेज बुलाया था. वहीं से देर रात को दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में मृणाल घोष की पत्नी तथा जलपाईगुड़ी जिले की चाइल्ड प्रोटेक्शन अधिकारी सस्मिता घोष की भी गिरफ्तारी हो सकती है. सीआइडी सूत्रों ने बताया है कि उनसे भी पूछताछ की गई है. सस्मिता घोष पहले से ही जांच एजेंसियों के राडार पर हैं. जलपाईगुड़ी की जिला अधिकारी रचना भगत ने भी उन्हें कारण बताओ नोटिस पहले ही जारी कर दिया है. हालांकि उन्होंने अपने जवाब में खुद को निर्दोष बताया है.