डायन : आदिवासी इलाकों में जागरूकता शिविर

कालियागंज. इस आधुनिक जमाने में भी आदिवासी समुदाय के बीच डायन प्रथा को लेकर कई प्रकार के अंधविश्वास व्याप्त है. बीच-बीच में डायन के नाम पर किसी आदिवासी महिला की हत्या अथवा मारपीट जैसी घटना घटती रहती है. अब आदिवासी समुदाय को जागरूक करने के लिए उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन ने विशेष अभियान की शुरूआत […]

कालियागंज. इस आधुनिक जमाने में भी आदिवासी समुदाय के बीच डायन प्रथा को लेकर कई प्रकार के अंधविश्वास व्याप्त है. बीच-बीच में डायन के नाम पर किसी आदिवासी महिला की हत्या अथवा मारपीट जैसी घटना घटती रहती है. अब आदिवासी समुदाय को जागरूक करने के लिए उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन ने विशेष अभियान की शुरूआत की है.

उत्तर दिनाजपुर जिले के इटाहार ब्लॉक प्रशासन द्वारा सरायदिघी तथा गुलियापाड़ा के आदिवासी बहुल इलाकों में ढाक बजाकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. आदिवासियों को समझाया-बुझाया जा रहा है और परचे आदि भी बांटे जा रहे हैं. इसके साथ ही किसी के बीमार होने की स्थिति में तंत्र-मंत्र का सहारा न लेकर डॉक्टरों के यहां जाने की सलाह दी जा रही है.

यहां उल्लेखनीय है कि वर्तमान में तृणमूल सरकार द्वारा राज्य के हरेक ब्लॉक में एक ढाक बजाने वाले को सरकारी नौकरी दी गई है. इटाहार ब्लॉक में यह काम बलराम दास कर रहे हैं. उन्हें सरकार की ओर से हर महीने करीब साढ़े नौ हजार रुपये का वेतन मिलता है. ब्लॉक प्रशासन की ओर से उन्हें आदिवासी बहुल इलाके में ढाक बजाकर आम लोगों को जागरूक करने के लिए कहा गया है. बलराम दास ने आगे कहा कि आदिवासी समुदाय अभी भी समाज में काफी पीछे है और उनके अंदर कुसंस्कार की भी कमी नहीं है. कम उम्र में ही बच्चों की शादी कर दी जाती है. बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजने आदि पर भी आदिवासी जोर नहीं देते. वह घर-घर जाकर पहले ढाक बजाते हैं, फिर आदिवासियों को ऐसे कुसंस्कारों से दूर रहने के लिए समझाते हैं.

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