आम फलने की कामना के साथ शिवलिंग की स्थापना

मालदा. मालदा जिला आम उत्पादन के लिए मशहूर है. लेकिन जिले में एक गांव है, जहां बीते कुछ सालों से पेड़ों पर आम नहीं लग रहे हैं. जबकि आम ही यहां के लोगों की रोजी-रोजगार है. आम के बागानों में फिर से फल लगने लगें, इसके लिए गांव के लोग अब शिव देवता की शरण […]

मालदा. मालदा जिला आम उत्पादन के लिए मशहूर है. लेकिन जिले में एक गांव है, जहां बीते कुछ सालों से पेड़ों पर आम नहीं लग रहे हैं. जबकि आम ही यहां के लोगों की रोजी-रोजगार है. आम के बागानों में फिर से फल लगने लगें, इसके लिए गांव के लोग अब शिव देवता की शरण में गये हैं. सुदूर काशी से काले पत्थर का शिवलिंग लाकर उसे पुकरिया थाने के कागाचिरा गांव में प्रतिष्ठित किया गया है. गांववालों का कहना है कि इस इलाके में एक बहुत पुराना शिवमंदिर है. लेकिन वह उपेक्षित पड़ा हुआ था. अब उस मंदिर का जीर्णेाद्धार करके और उसमें शिवलिंग की प्रतिष्ठा की गयी है. गांववालों का विश्वास है कि अब आम में अच्छे से फल लगेंगे.
बुधवार की सुबह से ही कागाचिरा गांव में धूमधाम से शिवलिंग प्रतिष्ठा के लिए पूजा-अर्चना शुरू हुई. गांववालों ने बताया कि इस गांव में करीब 250 घर हैं. ज्यादातर परिवार आम की उपज पर ही निर्भर हैं. लेकिन बीते कुछ सालों से गांव के बागानों में फल नहीं लग रहे हैं, जबकि जिले के दूसरे गांवों में आम की अच्छी पैदावार हो रही है. इस साल मालदा जिले के विभिन्न आग बागानों में खूब मंजर लगा है, लेकिन इस गांव के बागानों में मंजर नहीं आया है.
स्थानीय ग्रामवासी प्रदीप मंडल, शिवेन दास, सदानदं विश्वास आदि ने कहा कि पांच-सात साल पहले इस गांव से आम का प्रचुर व्यापार होता था. कई सौ बीघे जमीन में आम के बागान है. लेकिन तीन-चार सालों से बागानों में आम नहीं आ रहे हैं. इसका कोई कारण समझ में नहीं आ रहा है. पेड़ों पर नियमित स्प्रे करने से लेकर हर तरह की देखभाल करने के बावजूद फल नहीं आ रहे. जबकि आसपास के गांवों में आम फल रहा है. इसलिए हम लोग शिव उपासना कर आम फलने की कामना कर रहे हैं.
कागाचिरा शिव मंदिर कमिटी के अध्यक्ष प्रियनाथ दास ने बताया कि ग्रामवासियों के कहने के अनुसार पैसा इकट्ठा कर हम लोग काशी से शिवलिंग बनवाकर लाये हैं. साथ ही काशी से एक पुरोहित गिरीश नारायण त्रिपाठी पूजा करने आये हुए हैं. बुधवार से शिव उपासना शुरू हुई है. हमारा विश्वास है कि इससे बागानों में फल लगने लगेंगे.
इधर बागवानी विभाग के एक अधिकारी ने इसे अंधविश्वास बताते हुए पूरे मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही. उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि इलाके में आसपास कोई ईंट भट्ठा तो नहीं है. ईंट भट्ठे के धुएं से आम के पेड़ों को नुकसान होता है. इसके अलावा कई बार बागानों के पेड़ों के बहुत पुराने हो जाने की वजह से भी फल आने बंद हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि अपनी समस्या को लेकर इस गांव के लोग कभी बागवानी विभाग के पास नहीं आये. अगर वे ऐसा करते तो हम लोगों ने फल नहीं लगने के कारणों के बारे में जरूर पता लगाया होता.

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