उनका कहना है कि कॉलेज प्रबंधन और इ-टेंडर कंपनी प्राइम सिक्यूरिटी की मिलीभगत से सभी 23 कर्मियों की भरती प्रक्रिया में केवल तृणमूल कांग्रेस समर्थकों को ही नौकरी दी गयी है. इस बाबत बुधवार को जब भाजपा की हेल्थ एंड वेलफेयर सेल के बैनर तले पार्टी कार्यकर्ताओं ने डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल से जवाब तलब किया, तो उन्होंने इसका ठीकरा इ-टेंडर कंपनी पर फोड़ा. वहीं कंपनी के प्रबंधक इसके लिए कॉलेज प्रबंधन पर ठीकरा फोड़ रहे हैं.
श्री साहा का आरोप है कि बगैर पक्षपात किये और कानूरी तरीके से नौकरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कॉलेज प्रबंधन को पहले ही ज्ञापन सौंपा गया था. श्री साहा ने इस पूरे घपले की उच्च स्तरीय जांच एवं नियुक्ति जल्द खारिज कर निष्पक्ष तरीके से दुबारा प्रक्रिया किये जाने की मांग की है. ऐसा न होने पर मामला दायर करने और कॉलेज प्रबंधन और इ-टेंडर कंपनी को कोर्ट में घसीटने की धमकी भी उन्होंने दी है.
