सिलीगुड़ी : अस्थायी बीएसएनएल कर्मचारी सौमेन दास की मौत के 15 दिन बीत गये हैं. उसकी लापता पत्नी का शव बरामद करने का पुलिस दावा कर रही है,जबकि उसकी तीन वर्षीय लापता बेटी का अब तक कुछ पता नहीं चला है.
दूसरी तरफ पत्नी लिपिका की मां अंजली पात्र ने अपनी बेटी के बरामद शव पर सवालिया निशान लगाया है और उसके डीएनए टेस्ट की मांग की है. उन्होंने पुलिस पर जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है और कहा है कि इसी लापरवाही की वजह से लिपिका के मरने अथवा जीवित होने पर संशय है. न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से दो किलोमीटर की दूरी पर मिले शव को परिवार वालों ने लिपिका का शव मानने से इनकार कर दिया है.
इस वजह से पूरे मामले पर रहस्य गहराता जा रहा है. सौमेन दास का शव बरामद होने के 15 दिन गुजरने के बाद भी उसकी तीन वर्षीय बेटी का कुछ पता नहीं है. वहीं दूसरी तरफ लिपिका के लापता होने या उसकी मौत पर संशय बना हुआ है. लिपिका की मां अंजली पात्र का आरोप है कि प्रशासन मामले की जांच में काफी लापरवाही बरत रही है. उल्लेखनीय है कि बीते 24 जनवरी को सिलीगुड़ी के कॉलेजपाड़ा स्थित पीएंडटी कालोनी के ब्लॉक-3 के मकान नंबर तीन से एक अस्थायी बीएसएनएल कर्मचारी सौमेन दास का शव पुलिस ने बरामद किया था.
निर्वस्त्र शव बिस्तर पर पड़ा था और पूरे घर का सामान बिखरा पड़ा था. घटना स्थल से पुलिस को करीब 45 हजार रूपये नगद और कुछ गहने भी मिले थे. जबकि उसकी बेटी और पत्नी लिपिका दास लापता थी. लिपिका और तीन बर्षीय बच्ची की तालाश के दौरान जांच कर रही पुलिस के सामने बीते 9 जनवरी को एक अस्वाभाविक मौत का मामला आया. यहां बता दें कि 9 जनवरी को न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन से दो किलोमीटर की दूरी पर एक महिला का कटा हुआ शव बरामद हुआ था. न्यू जलपाईगुड़ी जीआरपी पुलिस ने एक सप्ताह बाद शव को मिट्टी में दफना दिया. इस महिला की कद काठी, कपड़े आदि लिपिका से काफी मिलते-जुलते पाये गये. पुलिस ने तुरंत लिपिका की मां अंजली पात्र को शव का फोटो दिखाया और उसकी शिनाख्त करायी. पहली नजर में अंजली पात्र ने शव का फोटो और कपड़े देखकर लिपिका की शिनाख्त की. फिर बाद में अपनी बात से मुकर रही है.अंजली पात्र ने कहा कि एक ही तरह के कपड़े कई लोगों के पास हो सकते हैं. फोटो में शव के चेहरे से कुछ साफ समझ में नहीं आ रहा है. इसके बाद उन्होंने लिपिका का शव मिट्टी से निकाल कर शिनाख्त कराने की मांग रखी. लिखित रूप में आवेदन ना करने की वजह से पुलिस ने इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाया. दूसरी तरफ मिट्टी में दफनाये शव को निकालने में काफी जटिलताएं भी है. जबकि डीएनए जांच के जरिए शिनाख्त कराना उससे आसान है.
लिपिका की मां अंजली पात्र ने बताया कि छह महीने पहले लिपिका के हाथ और पैर का ऑपरेशन कर स्टील का प्लेट लगाया गया था. इसके अतिरिक्त उसके शरीर पर कुछ जन्मजात निशान भी हैं. उन्हीं निशानों को देखकर शिनाख्त कराने की मांग पुलिस से की गयी थी. उन्होंने बताया कि एक ही तरह के कपड़े कई लोगों के हो सकते हैं, लेकिन डीएनए तो एक ही होता है. इसलिए लिपिका के शव की डीएनडी होनी चाहिए. इस संबंध में वह पुलिस प्रशासन से एक लिखित आवेदन करेंगी.
