सिलीगुड़ी : ट्यूशन पढ़ाते-पढ़ाते एक शिक्षक पर एक नाबालिग छात्रा को अपने प्रेम जाल में फंसाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. इतना ही नहीं, छात्रा की मां गीता देवी ने बीते वर्ष 31 दिसबंर को सिलीगुड़ी थाना में 35वर्षीय शिक्षक स्नेहाशीष दास पर अपने से आधे उम्र की 17वर्षीय छात्रा के अपहरण करने का मामला भी दायर कराया है. दर्ज मामले के तहत छात्रा 26 दिसंबर से सिलीगुड़ी से गायब है. उसी दिन शिक्षक ने उसे बहला-फूसलाकर अपहरण किया है. छात्रा सिलीगुड़ी कॉलेज में विज्ञान विभाग की प्रथम वर्ष की छात्रा है. वह यहां देशबंधुपाड़ा में अपनी अन्य सहेलियों के साथ पेइंग गेस्ट (पीजी) में रह रही थी. सिलीगुड़ी थाना ने कांड संख्या 1014 के तहत मामले की तहकीकात करते हुए अपह्रत छात्रा रेशमी कुमारी को शिलांग से सुरक्षित बरामद कर लिया.
हालांकि आरोपी शिक्षक स्नेहाशीष दास अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. 14 जनवरी से छात्रा को सिलीगुड़ी कोर्ट के निर्देश पर एक स्वयंसेवी संगठन सिनी के संरक्षण में रखा गया है. छात्रा तब से ही सिलीगुड़ी के हाकिमपाड़ा स्थित सिनी के होम में रह रही है.
नाबालिग छात्रा रेशमी की बड़ी बहन सोनी कुमारी ने सिनी के दो कर्मचारी एक महिला देवजानी और एक पुरूष डॉ देवाशीष (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सदस्य) पर भी छात्रा को बहकाने और आरोपी शिक्षक को बचाने का आरोप लगाया है.
सोनी का कहना है कि सिनी वाले उन लोगों को छात्रा से न तो मिलने दे रहे हैं और न ही बातचीत करवा रहे हैं. सोनी का कहना है कि देवजानी और डॉ देवाशीष स्नेहाशिष के साथ मिले हुए हैं. उसका कहना है कि छोटी बहन कल यानी शुक्रवार को 18 की हो जायेगी. रेशमी के बालिग होते ही कोर्ट में उससे स्नेहाशीष के पक्ष में बयान दिलवाने की जोर आजमाइश लगायी जा रही है. अगर ऐसा होता है तो रेशमी का जीवन नरक बन जायेगा. सोनी ने कहना है कि सिनी के दोनों कर्मियों के विरूद्ध पुलिस कमिश्नर के पास लिखित शिकायत करेंगी.सोनी ने बताया कि वे लोग बिन्नागुड़ी में रहते हैं.
पिता रामचंद्र साह अब रिटायर हो चुके हैं. आरोपी स्नेहशीष बिन्नागुड़ी में बहन को 11वीं का ट्यूशन पढ़ाया करता था. उसने अन्य लड़कियों की तरह रेशमी को भी अपने प्रेम जाल में फांस लिया. स्नेहाशीष मूल रूप से असम के केचर जिले के कप्तानपुर गांव का रहनेवाला है. स्नेहाशीष ने 28 दिसंबर को फोन कर हमें धमकी दी थी कि उसकी बहन मेरे पास है वह अब आप लोगों के पास कभी नहीं जायेगी. जो करना है कर लो. इस बाबत सिन्नी के संयोजक शेखर साहा से उनके मोबाइल फोन पर कई बार कोशिश करने के बाद भी संपर्क नहीं हो सका.
