यहां उल्लेखनीय है कि बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करने के लिए ही मिड डे मिल योजना की शुरूआत साल 1995 में गयी है. हांलाकि इस कार्यकारी साल 1997 से किया गया. गरीब माता-पिता अपने बच्चे को एक टाइम का खाना मिल जाने के बहाने ही बच्चे को स्कूल भेजेंगे. सरकार के इस योजना को सफलता मिली और सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुयी. इस बीच खाना बनाने में सावधानी नहीं बरतने के कारण मिड डे मिल खाकर कइ बच्चों के बीमार होने की खबरें भी आयी. इस परिस्थित को ध्यान में रखकर राज्य सरकार के स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय ने विभिन्न जिलों के डीआइ को एक दिशा निर्देश जारी किया है. उसके बाद डीआइ की ओर से भी इस निर्देश को स्कूलों में पहुंचा दिया गया है.इस दिशा निर्देश में मिड डे मिल योजना के तहत खाना बनाने कइ प्रकार की सावधानियां बरतने के लिए कहा गया है.
इसके अनुसार साग-सब्जी काटने से पहले उसके कम से कम दस से 15 मिनट तक पानी में भिंगो कर रखने,खाना बनाने से पहले हाथ अच्छी तरह से धोने आदि सहित कइ निर्देश दिये गए हैं.इस संबंध में फरीदपुर जुनियर हाइ स्कूल के प्रधान शिक्षक देवाशीष गंगापुत्र ने कहा कि स्कूल में 6 से 14 साल के बच्चों के लिए मिड डे मिल योजना है. इसका मतलब है प्रथम श्रेणी से अस्टम श्रेणी के बच्चों को दोपहर के भोजन की व्यवस्था की जाती है.बच्चों को पौष्टिक आहार कैसे मिले,इसको लेकर ही डीआइ कार्यालय की ओर से नया दिशा-निर्देश जारी किया गया है.उन्होंने अपने स्कूल में इसके लिए एक मोनिटरिंग कमेटी का भी गठन किया है.
