वह जितना दिन भी जीवित रहते हैं, उन्हें घोर तकलीफों का सामना करना पड़ता है. नयी तकनीक पेलीएटिव सपोर्ट की मदद से कैंसर रोगियों की जिंदगी आसान की जा सकती है. इस तकनीक के माध्यम से कैंसर रोगी के पेट में एक स्टैंट लगाया जाता है. जिसकी मदद से वह आम लोगों की तरह नियमित रूप से खान-पान कर सकता है. इस तकनीक को ऐसे कैंसर रोगियों के लिए विकसित किया गया है जो गॉल ब्लाडर के कैंसर से पीड़ित हैं. डॉक्टर प्रवीर ने आगे कहा कि आम तौर पर कैंसर की बीमारी का पता पहले स्टेज पर चल जाये, तो रोगियों की चिकित्सा संभव है
अंतिम स्टेज में रोगियों को बचा पाना काफी मुश्किल है. गॉल ब्लाडर में कैंसर के अंतिम स्टेज के रोगी दर्द से काफी परेशान रहते हैं. वह जीतने दिन भी जीवित रहेंगे, उन्हें भारी तकलीफ का सामना करना पड़ता है. ऐसे रोगियों में पोलीएटिव सपोर्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. उन्होंने बताया कि नेवटिया अस्पताल में पहली बार इस तकनीक का उपयोग कर एक कैंसर रोगी को थोड़ी राहत देने की कोशिश की गई है.
