चिटफंड घोटाला. निवेशकों और एजेंटों के पैसे शीघ्र लौटाने की मांग, सरकार के खिलाफ खोला मोरचा

सिलीगुड़ी: चिटफंड कंपनियों के निवेशकों तथा एजेंटों ने तत्काल पैसा लौटाने की मांग को लेकर एक बार फिर से राज्य सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. इन लोगों ने चिटफंड कंपनियों की संपत्ति नीलाम कर सभी निवेशकों एवं एजेंटों को पैसा वापस करने की मांग की है. अपनी इस मांग को और धारदार बनाने […]

सिलीगुड़ी: चिटफंड कंपनियों के निवेशकों तथा एजेंटों ने तत्काल पैसा लौटाने की मांग को लेकर एक बार फिर से राज्य सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. इन लोगों ने चिटफंड कंपनियों की संपत्ति नीलाम कर सभी निवेशकों एवं एजेंटों को पैसा वापस करने की मांग की है. अपनी इस मांग को और धारदार बनाने के लिए पूरे उत्तर बंगाल के चिटफंड पीड़ित चार फरवरी को सिलीगुड़ी में जमा होंगे और आगे की आंदोलन जोरदार करने के लिए आपस में विचार-विमर्श करेंगे. इस बैठक में चिटफंड पीड़ितों एवं एजेंटों के तीन संगठन के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में चिटफंड सफरर्स ऐंड एजेंट यूनिटी फोरम के कन्वेनर पार्थो मैत्रा ने बताया कि इससे पहले कई बार आंदोलन किया जा चुका है, लेकिन चिटफंड पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है.

चिटफंड कंपनियों में लाखों लोग अपना सर्वस्व गंवा चुके हैं. इसके अलावा ऐसे एजेंटों की संख्या भी काफी है जो अपना सबकुछ खो चुके हैं. इन लोगों को अब तक इंसाफ नहीं मिला है. उन्होंने तृणमूल सरकार पर हमला करते हुए कहा कि राज्य में तृणमूल सरकार के आने के बाद से चिटफंड कंपनियों की बाढ़ आ गई. गरीब लोगों ने इन कंपनियों में अपना पैसा निवेश किया. बाद में करोड़ों रुपये डकार कर चिटफंड कंपनी के लोग चलते बने. इन कंपनियों में पैसे लगाने वाले निवेशक पैसा वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन उनको पैसे लौटाने की कोई व्यवस्था नहीं हो रही है. श्री मैत्रा ने आगे कहा कि चिटफंड घोटाले की जांच सीबीआई तथा ईडी द्वारा पिछले तीन साल से जारी है. वह लोग सीबीआई अथवा ईडी के जांच के विरोधी नहीं हैं. सीबीआई जांच तेजी से होनी चाहिए और दोषियों को तत्काल सजा भी मिलनी चाहिए. समस्या यह है कि सीबीआई और ईडी जांच के बीच निवेशकों एवं एजेंटों के पैसे लौटाने की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है. उनके संगठन की पहली प्राथमिकता निवेशकों एवं एजेंटों के पैसे वापस कराने की है. श्री मैत्रा ने चिटफंड कंपनियों की संपत्ति बेचकर निवेशकों एवं एजेंटों के पैसे लौटाने की मांग की. उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर बंगाल में तमाम चिटफंड कंपनियों ने बड़े पैमाने पर नामी और बेनामी संपत्ति खरीद रखी है. निवेशक उन संपत्तियों को देख भी रहे हैं. निवेशकों को लगता है कि कभी न कभी चिटफंड कंपनियों की संपत्ति नीलाम होगी और निवेशकों के पैसे वापस कर दिये जायेंगे, जबकि राज्य सरकार इस दिशा में पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है. उन्होंने चिटफंड कंपनियों की संपत्ति तत्काल नीलाम करने की मांग की.

शिकायत के बाद भी लाभ नहीं

इस संगठन के एक अन्य नेता दिवाकर राय ने कहा कि उत्तर बंगाल में पिछले कुछ सालों के दौरान सैकड़ों चिटफंड कंपनियां उग आयी थी. इन कंपनियों ने आम लोगों के करोड़ों रुपये डकार लिये. ऐसा नहीं है कि निवेशकों तथा एजेंटों ने ऐसी कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करायी है. सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में करीब साढ़े तीन लाख निवेशकों ने विभिन्न थानों में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ है. राज्य सरकार अथवा जांच एजेंसियां पैसे लौटाने की दिशा में कुछ भी नहीं कर रही है.

तीन संगठनों द्वारा संयुक्त आंदोलन

निवेशकों तथा एजेंटों के पैसे वापस लौटाने की मांग को लेकर तीन संगठनों द्वारा संयुक्त आंदोलन किया जायेगा. श्री राय ने कहा कि चार फरवरी को सिलीगुड़ी में होने वाली बैठक में चिटफंड सफरर्स ऐंड एजेंट यूनिटी फोरम के अलावा पहाड़ के निवेशकों के हित में गठित चिटफंड पीड़ित जनता एवं राज्य स्तर के चिटफंड अमानतकारी एजेंट सुरक्षा मंच के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इस बैठक में आने वाले दिनों में आंदोलन की नयी रणनीति पर विचार होगा. श्री राय ने कहा कि माध्यम तथा उच्च माध्यमिक की परीक्षा शीघ्र होने वाली है. आंदोलन की रणनीति तय करने में इन परीक्षाओं को भी ध्यान में रखा जायेगा.

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