प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भूमि मालिकों व किसानों का गुस्सा चरम पर था. सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित ग्रामीणों ने डंडा, रड, लाठी, पत्थर आदि के साथ हमला किया. ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योग के लिए आवंटित भूमि पर उद्योग न लगाकर विश्वविद्यालय के लिए चारदीवारी खड़ी की जा रही है. राज्य की मां माटी मानुष की सरकार ने धोखा किया है. ग्रामीण अपनी भूमि वापस चाहते हैं. यदि उद्योग नहीं होगा तो उक्त भूमि पर विश्वविद्यालय नहीं बनने दिया जायेगा.
तोड़फोड़ और आगजनी की घटना के बाद विश्व विद्यालय का निर्माण कार्य ठप हो गया है. घटना के बाद पुलिस भी आतंकित है. बीरभूम जिला तृणमूल अध्यक्ष अनुब्रत मंडल ने कहा कि विकास विरोधी शक्तियां किसानों और भूमि मालिकों को भड़का रही हैं. उन्हें गलत रास्ता दिखाया जा रहा है. विश्वबंग विश्वविद्यालय के आने से क्षेत्र का विकास होगा. उनकी समस्या को लेकर बातचीत की जायेगी. गौरतलब है कि बोलपुर के शिवपुर मौजा में तीन सौ एकड़ भूमि राज्य सरकार ने आवंटित की है.
यहां पर आइटी हब व उद्योग लगाने के लिए किसानों से भूमि ली गयी थी. लेकिन बीते 10 जनवरी को जयदेव मेला में बाउल अकादमी के उद्घाटन के दौरान उक्त भूमि पर विश्वबंग विश्वविद्यालय व आवास बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की. विश्वविद्यालय के लिये चारदीवारी का निर्माण कार्य शुरू हो गया. कृषकों को जब पता चला तो वे भड़क गये. राज्य के शिक्षा मंत्री व तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने भांगड़ भूमि आंदोलन की घटना के बाद घोषणा की थी कि राज्य के कृषक भूमि मालिक यदि नहीं चाहेंगे तो एक इंच भी जमीन उनकी नहीं ली जायेगी या अन्य काम में नहीं लगाया जायेगा. यदि राज्य सरकार अपनी बात पर ही सटीक रहती है तो मुख्यमंत्री के विश्वबंग विश्व विद्यालय के सपने का क्या होगा. यह बड़ा सवाल राजनीतिक गलियारे में उठ रहा है.
