मालदा में बंद जूट मिल को खोलने की पहल

मालदा. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा हजार तथा पांच सौ रुपये के नोट बंद किये जाने की घोषणा के बाद गाजोल में एक जूट मिल को बंद कर दिया गया था. नगदी संकट के अभाव में मिल मालिकों ने जूट मिल को बंद करने की घोषणा की थी. मिल के बंद होने से करीब […]

मालदा. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा हजार तथा पांच सौ रुपये के नोट बंद किये जाने की घोषणा के बाद गाजोल में एक जूट मिल को बंद कर दिया गया था. नगदी संकट के अभाव में मिल मालिकों ने जूट मिल को बंद करने की घोषणा की थी. मिल के बंद होने से करीब 500 श्रमिक बेरोजगार हो गये थे. अब फिर से उस जूट मिल को खोलने की पहल शुरू की गई है. तृणमूल श्रमिक संगठन आइएनटीटीयूसी ने जूट मिल खोलने को लेकर मिल मालिकों के साथ ही जिला एवं ब्लॉक प्रशासन के अधिकारियों को चिट्ठी लिखी है और यथाशीघ्र बंद मिल को खोलने की मांग की गई है. श्रम विभाग को भी इस बात की जानकारी दी गई है.

जिला श्रम विभाग के एक अधिकारी ने कहा है कि बंद मिल खोलने को लेकर आठ फरवरी को एक बैठक बुलायी गई है. उस बैठक में समस्या का समाधान होने की उम्मीद है. मालदा जिले के गाजोल ब्लॉक के अंतर्गत शहजादपुर ग्राम पंचायत के खजुरतला इलाके में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे कालियागंज एग्रो प्राइवेट लिमिटेड नामक यह जूट मिल अवस्थित है. यहां मुख्य रूप से सुतली तथा चट्टी बनाने का काम होता है. पिछले सात जनवरी को मिल मालिकों ने अचानक सस्पेंशन ऑफ वर्क का नोटिस लगाकर मिल को बंद कर दिया. इसके बाद ही यहां काम करने वाले श्रमिक काफी परेशान हैं.

पांच सौ से भी अधिक श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है. मिल बंद होने से बेकार हुए श्रमिक रहीम अंसारी, बिनय मंडल, प्रताप साहा, दिलवर शेख आदि ने कहा कि नवंबर महीने में हजार तथा पांच सौ रुपये के नोट बंद होने के बाद से ही वेतन मिलने में परेशानी होने लगी. इनका कहना है कि मिल मालिक घाटे की बात कर रहे थे. मिल मालिकों का कहना था कि नोटबंदी से उत्पादित माल की बिक्री बंद हो गई है. उसके बाद अचानक सात जनवरी को जूट मिल बंद कर देने की घोषणा कर दी गई. श्रमिकों ने आगे कहा कि अब तृणमूल के श्रमिक संगठन की ओर से जूट मिल खोलने की कोशिश की जा रही है. श्रमिकों ने तृणमूल नेताओं से बातचीत भी की है. उसके बाद तृणमूल नेताओं ने इस समस्या की जानकारी प्रशासन को दी है. अब आठ फरवरी को मिल मालिक यहां बैठक करने आ रहे हैं.

क्या कहना है प्रबंधन का
इस जूट मिल के मैनेजर रामशरण दास ने बताया है कि नोटबंदी के बाद श्रमिकों को वेतन देने में परेशानी हो रही है. नवंबर महीने से उत्पादन की बिक्री में भी काफी कमी हो गई है. नुकसान उठाकर मिल चलाना संभव नहीं है. इसके अलावा कुछ श्रमिक भी गड़बड़ी कर रहे हैं. श्रमिकों ने कई बार प्रबंधन के साथ जोर-जबरदस्ती की. ऐसी परिस्थिति में मिल को चला पाना संभव नहीं हो रहा था. आखिरकार बाध्य होकर मिल को बंद करने का निर्णय लिया गया.
क्या कहते हैं तृणमूल नेता
गाजोल के तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक उपाध्यक्ष तथा श्रमिक नेता अरविंद घोष ने बताया है कि मिल बंद होने से करीब पांच सौ श्रमिक बेरोजगार हो गये हैं. उनके परिवार के सामने भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. मिल बंद होने के लिए न तो श्रमिक और न ही मिल मालिक दोषी हैं. नोटबंदी की वजह से मिल बंद हुआ है. वह लोग चाहते हैं कि जैसे भी हो, मिल जल्द चालू हो. प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही मिल मालिक और संबंधित थाने को इस बात की जानकारी दे दी गई है. श्रम विभाग की ओर से आठ फरवरी को एक बैठक बुलायी गई है. उस बैठक में समस्या समाधान की कोशिश करेंगे.
क्या कहते हैं बीडीओ
गाजोल के बीडीओ विष्णुपद चक्रवर्ती ने कहा है कि उन्होंने भी मिल बंद होने की खबर सुनी है. वह कारणों की जांच कर रहे हैं. इसके अलावा एक रिपोर्ट भी बनायी जा रही है. इस रिपोर्ट को वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेज दिया जायेगा.

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