श्री शील ने कहा कि पुलिस प्रशासन भी बीच-बीच में छापामारी कर इस गोरखधंधे का खुलासा करती है. लेकिन इसके बावजूद इस गोरखधंधे पर पूरी तरह से नकेल कस नहीं पा रही. उन्होंने कहा कि ब्यूटी पार्लरों की वजह से सैलूनों के कारोबार पर व्यापक असर पड़ा है.
श्री शील का कहना है कि नाई समुदाय से जुड़े लोग वर्षों से अपनी हक की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं. लेकिन सरकार, शासन-प्रशासन पर आजतक इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. सरकार से आजतक नाई जाति को ओबीसी की मान्यता नहीं मिली और न ही अन्य सरकारी सुविधाएं मिली है. बैंक भी नाई जाति के साथ सौतेला व्यवहार करते हैं. नाई जाति को बैंक ऋ ण नहीं देना चाहती.
अगर बैंक से नाई जाति को ऋ ण की सुविधा मिलती है तो वह अपने सैलून को ब्यूटी पार्लर में तब्दील कर सकते हैं और बेपटरी हो चुके अपने कारोबार को वापस पटरी पर ला सकते हैं. उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों को पांच जनवरी को स्थानीय किरण चंद्र भवन में समिति की वार्षिक आमसभा में विशिष्ठ अतिथियों, पदाधिकारियों व सदस्यों की मौजूदगी में उठाया जायेगा. इसी आमसभा में सबों की सहमति पर सभी मुद्दों को लेकर भावी रणनीति का खाका तैयार किया जायेगा और समिति द्वारा एकबार फिर हक लड़ाई के लिए आंदोलन किया जायेगा. प्रेस-वार्ता के दौरान समिति के अन्य कई पदाधिकारी व सदस्य भी मौजूद थे.
